चंबा। मरीजों की जांच के लिए पहले ही तकनीशियनों की कमी से जूझ रहे चंबा मेडिकल कॉलेज को अब एक और झटका लगा है।
सरकार ने यहां तैनात एक और लैब तकनीशियन का दूसरे जिले में तबादला कर दिया लेकिन उसके स्थान पर किसी दूसरे तकनीशियन की तैनाती नहीं की गई। मेडिकल कॉलेज में तकनीशियनों के 98 पद स्वीकृत हैं लेकिन इनमें से 63 पद खाली पड़े हैं।
इसके बावजूद तबादलों का सिलसिला जारी है। पांच से छह महीनों में मेडिकल कॉलेज से चार स्थायी लैब तकनीशियनों का तबादला हो चुका है। वर्तमान में 25 पद आउटसोर्स और 10 पद नियमित कर्मचारियों से भरे हैं। तकनीशियनों की कमी का सीधा असर मरीजों की जांच व्यवस्था पर पड़ने की आशंका है।
मेडिकल कॉलेज में रोजाना करीब 1000 मरीजों की ओपीडी रहती है। डॉक्टर मरीजों को विभिन्न प्रकार की जांच करवाने की सलाह देते हैं। इसके चलते सरकारी प्रयोगशाला में सुबह से दोपहर तक मरीजों की भीड़ रहती है। रात को भी जिलेभर से आपात स्थिति में मरीज मेडिकल कॉलेज पहुंचते हैं और उनकी जरूरी जांच सेंटर लैब में की जाती है।
सेंटर लैब में जांच का जिम्मा लैब तकनीशियनों पर ही रहता है। ऐसे में यदि तकनीशियनों के रिक्त पदों को नहीं भरा गया और तबादले जारी रहे तो जांच व्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। मरीजों को जांच के लिए अधिक इंतजार करना पड़ सकता है और इसका असर उपचार प्रक्रिया पर भी पड़ने की आशंका है।
उधर, चंबा मेडिकल कॉलेज के प्रवक्ता डॉ. मानिक सहगल ने बताया कि सरकार को रिक्त पदों के बारे में अवगत करवाया गया है। जल्द ही नई तैनाती होने की उम्मीद है।