जिले के 230 आंगनबाड़ी केंद्रों में छाया अंधेरा, अब तक नहीं लग पाए बिजली के कनेक्शन
बिजली कनेक्शन न होने के चलते खराब मौसम के बीच बिन बिजली हो रही पढ़ाई
जनजातीय क्षेत्र भरमौर पांगी सहित तीसा और सलूणी में नहीं लग पाए बिजली कनेक्शन
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। जिले की वादियों में जहां बादल पहाड़ों से पहले उतर आते हैं और सर्दी अपनी सबसे कठोर शक्ल दिखाती है, वहीं 230 आंगनबाड़ी केंद्र ऐसे भी हैं जहां रोशनी सिर्फ एक उम्मीद बनकर रह गई है। यह कहानी सिर्फ बिजली की कमी की नहीं, बल्कि उन नन्हे बच्चों की है जो अंधेरे कमरों में अपने भविष्य के पहले अक्षर टटोलते हैं। विकास की बातें सरकारी फाइलों में चलती हैं। जमीन पर ठंड, सन्नाटा और इंतजार बोलता है। जनजातीय क्षेत्र भरमौर, पांगी के साथ तीसा और सलूणी ब्लॉक के सैकड़ों केंद्रों में अब तक बिजली नहीं पहुंची है।
भरमौर-पांगी में नवंबर से ही बर्फबारी शुरू हो जाती है। बिजली न होने से आंगनबाड़ी केंद्रों में हीटर, बल्ब कुछ नहीं चल पाता। छोटे बच्चे अंधेरे कमरों में ठिठुरते हुए बैठते हैं। अभिभावकों ने बताया कि बादल या बारिश होने पर दिन में भी कमरों में अंधेरा हो जाता है। उन्होंने बताया कि वे कई बार विभाग से बिजली कनेक्शन लगवाने की मांग कर चुके हैं लेकिन अब तक कोई पहल नहीं हुई। एक तरफ सरकार डिजिटल की बात करती है तो वहीं, दूसरी तरफ जिला चंबा के आंगनबाड़ी केंद्रों में बिजली कनेक्शन ही नहीं हैं। उधर, महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी कमल किशोर शर्मा ने बताया कि फील्ड से रिपोर्ट मांगी गई है। इस बारे में जल्द उचित पहल की जाएगी।
एक तरफ सरकार बच्चों को आंगनबाड़ी में प्रवेश दिलवाने के आग्रह करती है, दूसरी ओर आंगनबाड़ी केंद्रों में बिजली मीटर तक नहीं लगे हैं। - सुशील कुमार
ग्रामीण क्षेत्रों के आंगनबाड़ी केंद्रों में मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। इससे बच्चों को परेशानियां पेश आती हैं। सरकार को बेहतर व्यवस्था करनी चाहिए। - बविंद्र सिंह
सर्दियों में जिले के दुर्गम आंगनबाड़ी केंद्रों में काफी ठंड पड़ती है। ऐसे में मौसम खराब होने की सूरत में कमरों में अंधेरा हो जाता है। - अरुण कुमार
अंधेरे में पढ़ाई संभव नहीं है। विभाग और सरकार को मामले में सुध लेनी चाहिए जिससे नौनिहालों को सुविधाएं मिल सकें। - पवन कुमार