भरमौर (चंबा)। चौरासी परिसर में मणिमहेश श्रद्धालुओं को बुधवार को गद्दी संस्कृति की झलक देखने को मिली। यात्रा के दौरान मणिमहेश यात्रा के छोटे शाही स्नान यानी जन्माष्टमी के अगले दिन से चौरासी परिसर पर नौ जातरेें आयोजित की जाती हैं।
हर जातर किसी न किसी देवी-देवता या सिद्ध पुरुष के नाम पर समर्पित है। बुधवार दोपहर को स्थानीय महिलाएं और पुरुष पारंपरिक वेशभूषा में पारंपरिक नृत्य करते नजर आए। मणिमहेश यात्रा के दौरान देश के हर कोने से श्रद्धालु कैलाश पर्वत के दर्शन करने आते हैं। ऐसे में चौरासी परिसर में जातरों के दौरान उन्हें पारंपरिक संस्कृति देखने को मिल रही है। भरमौर के संचूई, मलकौता, पंजसेई, घरेड, गौआ और गोसन आदि गांवों से लोग पारंपरिक परिधानों में जातर में पहुंचे। यहां उन्होंने भरमौर की पुरानी संस्कृति से श्रद्धालुओं को रूबरू करवाया। संवाद