स्टाफ की भारी कमी से चरमराई व्यवस्था, 47 में से केवल 3 प्रसार अधिकारी तैनात
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। जिले में कृषि विभाग की सेवाएं बीते चार सालों से बदहाल स्थिति में हैं। हालात ऐसे हैं कि एक-एक प्रसार अधिकारी को पांच-पांच उपकेंद्रों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है।
स्टाफ की भारी कमी के चलते न तो किसानों तक सरकारी योजनाएं पहुंच पा रही हैं और न ही उन्हें समय पर जरूरी सुविधाएं मिल रही हैं। हैरानी की बात तो यह है कि कृषि प्रसार अधिकारियों के 47 पद स्वीकृत हैं लेकिन इनमें केवल 3 अधिकारी ही सेवाएं दे रहे हैं। 44 पद लंबे समय से खाली हैं। ऐसे में मौजूदा अधिकारियों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। इसका सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि उन्हें समय पर बीज तक उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। कई बार उन्हें उपकेंद्रों के चक्कर काटने पड़ते हैं लेकिन वहां अधिकारी नहीं मिलते और उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ता है। स्थिति यह भी है कि कई उपकेंद्र चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के भरोसे चल रहे हैं जिससे न तो सही मार्गदर्शन मिल पा रहा है और न ही योजनाओं की जानकारी। विभाग की ओर से किसानों के लिए जागरूकता शिविर भी आयोजित नहीं किए जा रहे हैं। सरकार की इस लापरवाही से किसानों में रोष बढ़ता जा रहा है। उनका कहना है कि यदि जल्द खाली पद नहीं भरे गए और सेवाओं में सुधार नहीं हुआ तो कृषि कार्य पर इसका गंभीर असर पड़ेगा।
हम कई बार बीज लेने उपकेंद्र जाते हैं लेकिन वहां कोई अधिकारी नहीं मिलता। हर बार खाली हाथ लौटना पड़ता है जिससे फसल का समय खराब हो जाता है। - सुरेश कुमार
सरकार की कौन-सी योजना चल रही है, हमें इसकी जानकारी ही नहीं मिलती। अगर अधिकारी ही नहीं होंगे तो हमें मार्गदर्शन कौन देगा। - राकेश कुमार
एक अधिकारी पर पांच उपकेंद्रों की जिम्मेदारी डाल दी गई है, ऐसे में वह हर जगह कैसे पहुंचेगा। इसका खामियाजा हम किसानों को भुगतना पड़ रहा है। - कमलेश वर्मा
पहले गांवों में शिविर लगते थे जिससे नई खेती की जानकारी मिलती थी। अब लंबे समय से कोई शिविर नहीं लगा जिससे हम नई तकनीकों से वंचित रह रहे हैं। - रविकांत शर्मा
कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. भूपेंद्र सिंह का कहना है कि स्टाफ की काफी कमी चल रही है। जिसके बारे में बार- बार उच्चाधिकारी को अवगत करवाया जा रहा है। उम्मीद है कि जल्द जिला में पूरे स्टाफ की तैनाती हो जाए।