ऑर्गेनिक हल्दी की खेती की ओर बढ़ा भटियात क्षेत्र के किसानों का रुझान
करीब सौ किसानों ने शुरू की हल्दी की खेती, बाहरी जिलों के लिए होगी निर्यात
किसान बोले, प्रगतिशील किसान कल्याण समिति के तहत 50 क्विंटल हल्दी के बीज की भेजी है मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। गेंदा के फूलों की खेती के बाद अब हल्दी किसानों जेंबे भरेंगी। हल्दी की खेती से किसानों को अच्छी आय प्राप्त होगी। भटियात के किसानों का रुझान ऑर्गेनिक हल्दी के खेती की ओर बढ़ा है। करीब सौ किसानों ने हल्दी की खेती शुरू करने की ठानी है। इसकी बाहरी जिलों के लिए निर्यात होगी। किसानों का एक प्रगति किसान कल्याण समिति समूह बना है। इसके तहत 50 क्विंटल हल्दी के जड़ों की डिमांड भेजी है।
किसान पवन कुमार का कहना है कि वे जंगली गेंदा से भी अच्छी कमाई कर रहे है तो देसी हल्दी की खेती करना शुरू कर रहे हैं। हल्दी की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु और मिट्टी की उपलब्धता के कारण यह एक लाभदायक फसल साबित होगी। इसके अलावा हल्दी की मांग बाजार में हमेशा रहती है, जिससे किसानों को अपनी फसल को बेचने में आसानी होगी। कहा कि गेंदा के बाद अब हल्दी की खेती भी उनकी आय में वृद्धि का एक नया अवसर प्रदान कर सकती है। हल्दी, जिसका उपयोग आयुर्वेदिक चिकित्सा, मसालों और सौंदर्य उत्पादों में होता है, इसकी मांग में वृद्धि हो रही है। इससे किसानों को बेहतर मूल्य मिल सकता है और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है। हल्दी की खेती किसानों के लिए एक अच्छा विकल्प हो सकती है, खासकर अगर वे इसे सही तरीके से उगाते हैं और बाजार की मांग को समझते हैं। हल्दी की फसल उगाने के लिए सही मिट्टी, जलवायु और समय की जानकारी होना जरूरी है।
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कैसे करेंगे किसान हल्दी की खेती
किसानों की मानें तो हल्दी के लिए रेतीली दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है। मिट्टी का पीएच 6 से 7 के बीच होना चाहिए। हल्दी को उष्ण कटिबंधीय जलवायु में अच्छे से बढ़ने के लिए गर्मी और नमी की आवश्यकता होती है। हल्दी की खेती के लिए कंद का उपयोग किया जाता है। अच्छे गुणवत्ता वाले कंद का चुनाव करना जरूरी है। हल्दी की फसल को भरपूर पानी की जरूरत होती है, लेकिन जलभराव से बचाना चाहिए। इसके अलावा उर्वरकों का सही मात्रा में उपयोग करना फसल के लिए लाभकारी होता है। हल्दी को नियमित सिंचाई की आवश्यकता होती है, खासकर गर्मियों के दौरान इसे अधिक पानी की आवश्यकता होती है, लेकिन पानी का जमाव न हो, इसलिए अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी होनी चाहिए।