वन्य जीवों के साथ पकड़े गए आरोपी की तस्वीर: स्त्रोत विभाग
डलहौजी (चंबा)। वन मंडल चंबा से सीख लेकर अब वन मंडल डलहौजी भी वन्य जीवों की अवैध तस्करी को रोकने के लिए सजग हो गया है।
चंबा वन मंडल बड़े स्तर पर वन्य जीवों के अवशेषों की तस्करी करने वाले गिरोह को पकड़ चुका है। इस बार डलहौजी की टीम ने भी चार लोगों को वन्य जीवों के अवशेषों के साथ पकड़ा है। इन्हें अदालत में पेश किया गया। अदालत ने चारों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। पकड़े गए आरोपी साधु के वेश में जिंदा सांप को लेकर भी लोगों से आस्था के नाम पर पैसे ऐंठते हैं।
इन चार लोगों से विभाग ने 25 सियार, गीदड़ सिंघी, मॉनिटर छिपकली के आठ हथजोड़ी, मॉनिटर छिपकली के 13 पंजे, चार सांप की खोपड़ी, आठ सांप की रीढ़ की हड्डी के टुकड़े, 11 शैल के कांटे और फ्लैप शेल कछुए का एक खोल पकड़ा था। इसके अलावा उनके कब्जे से सांप की खाल का एक डिब्बा, 40 सिवेट कैट के पंजे और दो जीवित सांप-एक स्पेकटेकलड कोबरा और एक इंडियन सैंड बोआ बरामद किया गया। गिरफ्तार किए गए लोगों में से दो कांगड़ा जिले के नूरपुर शहर के पास जसूर के गांव छतरोली के रहने वाले हैं और दो पंजाब के लुधियाना के हैं। मामले की छानबीन के लिए सहायक अरण्यपाल वन विभाग रवि गुलरिया को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। आरोपियों पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है।
डीएफओ डलहौजी रजनीश महाजन ने बताया कि आरोपियों से पकड़े गए जंगली जानवर श्रेणी एक के वन्य जीव हैं। पशुपालन विभाग से इनकी फिटनेस जांच करवाने के बाद न्यायालय की अनुमति से उन्हें उन वन क्षेत्रों में छोड़ दिया गया है, जहां से वे पकड़े गए थे। कहा कि वन्य जीवों व उनके अंगों की तस्करी करना दंडनीय अपराध है। इसका पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है ।