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Chamba News: अचार से सजी सफलता की थाली, जायका लाया खुशहाली

Sun, 12 Oct 2025 11:00 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
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चंबा। शहर के जनसाली वार्ड की शकुंतला ने समर्पण और कड़ी मेहनत के साथ वह काम किया, जिसे देखकर लोग हैरान हैं। 10 साल पहले पति की मौत के बाद जब उनके परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आई तो उन्होंने न सिर्फ हार मानी, बल्कि स्वरोजगार के रास्ते पर चलकर खुद को आत्मनिर्भर बना लिया। अचार बनाकर न केवल उन्होंने अपनी जिंदगी को नया मोड़ दिया, बल्कि 20 अन्य महिलाओं को भी रोजगार से जोड़कर उन्हें जीवन में एक नया अवसर दिया।
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उनके बनाए गए अचार, जैसे- करेला, नींबू, आम, और अदरक तक, शिमला, दिल्ली और चंडीगढ़ जैसे बड़े शहरों में भी भेजे जाते हैं। हर महीने की 25,000 रुपये की कमाई और चंबा के अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेले में 50,000 रुपये की बिक्री, उनके अथक प्रयासों और सफलता की मिसाल है।
शकुंतला बताती हैं कि अचार के व्यवसाय से हर महीने हजारों रुपये की कमाई हो रही है। इस रकम से वह न केवल अपने परिवार का पालन-पोषण करती हैं बल्कि अपने बच्चों की शिक्षा और परिवार के अन्य खर्चों को भी पूरा करती हैं। इसके साथ ही उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने मेहनत और टीम वर्क को भी दिया है।
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स्वयं सहायता समूह के माध्यम से शुरू किया व्यवसाय
शकुंतला ने शहरी आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूह से जुड़कर ऋण लिया और व्यवसाय की शुरुआत की। उन्होंने अचार, घरेलू उत्पाद और हस्तनिर्मित खिलौनों का उत्पादन करना शुरू किया। शुरुआत में यह व्यवसाय स्थानीय बाजारों तक सीमित था, लेकिन उनकी मेहनत और उत्पादों की गुणवत्ता ने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई। अब उनका बनाया अचार बड़े शहरों में भी भेजा जाता है, जहां इसकी काफी मांग है।
अचार की विविधता और गुणवत्ता
शकुंतला के अचार में स्वाद और गुणवत्ता दोनों का अच्छा संतुलन है। वह विभिन्न प्रकार के अचार बनाती हैं जैसे कि करेला, नींबू, आम, अदरक और लहसुन का अचार। इसके अलावा वह टेडी बियर और अन्य सजावटी वस्तुएं भी बनाती हैं, जिनकी मांग बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि लोगों का अचार की गुणवत्ता को लेकर विश्वास बढ़ा है और यही कारण है कि उनके उत्पादों की बाजार में अच्छी खपत हो रही है।
मिंजर मेले से मिला मंच
हर साल चंबा में आयोजित होने वाला अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेला उनके व्यवसाय के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर बन गया है। शकुंतला इस मेले में अपने उत्पादों का स्टॉल लगाती हैं और पिछले साल उन्होंने मिंजर मेले में 50,000 रुपये की कमाई की थी। उनका कहना है कि मेला सिर्फ बिक्री का प्लेटफार्म नहीं है, बल्कि यह उनके लिए एक पहचान और प्रेरणा का भी स्रोत बन चुका है। यहां उन्हें अपने उत्पादों के बारे में फीडबैक मिलता है, जिससे वह अपने काम में और भी सुधार कर सकती हैं।
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