चंबा। भारतीय बाजार पर कब्जा कर रहे चाइनीज उत्पाद का चूना सिर्फ हाथ से दीये बनाने वालों की जेब पर नहीं लग रहा है, बल्कि सरकारी राजस्व का भी नुकसान हो रहा है। चाइना से दिल्ली के रास्ते चंबा के बाजार तक पहुंची अधिकतर चाइनीज आइटम पर मूल्य निर्धारित नहीं है। आबकारी एवं कराधान विभाग निर्धारित मूल्य के आधार पर ही टैक्स की वसूली करता है। ऐसे में बिना तय मूल्य के चाइनीज आइटम पर कितना टैक्स लगा होगा इसका ठीक से पता भी नही है। बाजार में चीनी उत्पादों के तौर पर लाइट, लड़ियां और सजावट का अन्य सामान उपलब्ध है। इसकी कीमत 60 रुपये से 500 रुपये तक दुकानदारों ने निर्धारित की है और इन आइटम के एक साल तक चलने की गारंटी भी ग्राहक को दी जा रही है। चाइनीज आइटम की बिक्री पर दुकानदार व कंपनी का मुनाफा तो नजर आ रहा है, लेकिन एक उत्पाद की बिक्री से सरकारी राजस्व में कितना बढ़ावा हुआ इसकी फिलहाल कोई जानकारी नहीं है। मापतोल विभाग बाजार में उपलब्ध चाइनीज आइटम पर निर्धारित मूल्य अंकित न होने के एवज में चालान भी काट चुका है, लेकिन विभाग के लिए भी
अब नहीं दिखते हाथ से बने दीये
कभी दिवाली पर हाथों से बनाए दीये जलाने की रस्म थी। बाद में मोमबत्ती ने इस रस्म पर कब्जा कर लिया और अब बदलते दौर के साथ चाइनीज लड़ियां और लाइटें बाजार में आ चुकी हैं। सस्ती होने की वजह से यह लोकप्रिय हुई हैं और आधुनिकता में लोग पुरानी रस्मों को भूलकर चाइनीज आइटम का इस्तेमाल कर रहे हैं।
साठ लाख का कारोबार होने की उम्मीद
चंबा में दिवाली के मौके पर चाइनीज आइटम का कारोबार साठ लाख रुपये तक होने का अनुमान है। जबकि हाथ से बने दीये का कारोबार पचास हजार तक पहुंचने की उम्मीद नहीं है। बाजार में भी हाथ से बने दीयों से ज्यादा चाइनीज आइटम की भीड़ है और उनकी बिक्री भी सबसे ज्यादा हो रही है।
चीनी उत्पाद निर्धारित मूल्य नहीं होते हैं, जिससे इन पर टैक्स नहीं लग पाता है। जिन उत्पादों पर निर्धारित मूल्य हैं, वे बेहद कम दर्शाए जाते हैं। इसके चलते 100 रुपये की उत्पादित वस्तु का मूल्य तीस रुपये निर्धारित होगा, जिससे उस वस्तु पर टैक्स तीस रुपये के हिसाब से पड़ेगा। जबकि दुकानदार इसे 100रुपये से ज्यादा ही बेचेगा। विभाग ने अब तक चंबा में एक दुकानदार का चालान निर्धारित मूल्य न होने के लिए काटा है।
-बृज मोहन शर्मा ,
नियंत्रक अधिकारी, मापतोल विभाग