तागी, टाटरी और जड़ोथा गांवों को जोड़ने वाली सड़क का निर्माण न होने से लोग खफा
बोले- खतरनाक पहाड़ी रास्तों से पैदल सफर कर पहुंचते हैं गांव, बच्चे-बुजुर्ग ज्यादा परेशान
कहा- मरीजों को अस्पताल ले जाना, घर का सामान पहुंचाना आज भी बना हुआ है संघर्ष
संवाद न्यूज एजेंसी
मैहला (चंबा)। सुनारा मार्ग से रुंगड़ी नाला होते हुए तागी, टाटरी और जड़ोथा गांवों को जोड़ने वाली सड़क आज भी अधूरी है। वर्ष 2013-14 में तत्कालीन वन मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी ने सड़क का शिलान्यास किया था। छह किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण पर अब तक करीब 85 लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं। 12 साल बाद भी सड़क लोगों के लिए सपना बनी हुई है। करीब 3500 आबादी वाले इस क्षेत्र के ग्रामीण आज भी सड़क से वंचित हैं। गांवों तक पहुंचने के लिए लोगों को खतरनाक पहाड़ी रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है। बुजुर्ग, महिलाएं, बच्चे और मरीज सबसे अधिक परेशान हैं। बरसात के मौसम में हालात और भी बदतर हो जाते हैं जब रास्ते फिसलन भरे और जानलेवा बन जाते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण के नाम पर शुरुआत में थोड़ा बहुत काम जरूर किया गया लेकिन बाद में निर्माण कार्य पूरी तरह ठप हो गया। समय-समय पर छोटे-छोटे टेंडर जारी कर सिर्फ औपचारिकताएं पूरी की जाती रहीं। जिन स्थानों पर प्रोटेक्शन वॉल बनाई गई थीं, वहां से पत्थर तक उखड़ चुके हैं।
कल्याण सिंह, बबलू कुमार, तिलक राज, कुलदीप कुमार, मलका देवी, सुनीता देवी और चतर सिंह ने बताया कि चुनावों के दौरान नेता गांवों में पहुंचकर बड़े-बड़े वादे करते हैं लेकिन चुनाव खत्म होते ही समस्याएं भुला दी जाती हैं। सड़क न होने के कारण क्षेत्र का विकास प्रभावित हो रहा है। मरीजों को अस्पताल पहुंचाना, बच्चों का स्कूल जाना और जरूरी सामान ढोना आज भी ग्रामीणों के लिए संघर्ष बना हुआ है। ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि वर्षों से अधूरी पड़ी इस सड़क का निर्माण जल्द पूरा किया जाए।
उधर, लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता राकेश मरोल ने कहा कि मामले की जांच करेंगे और जल्द ही समस्या का समाधान करवाने के लिए उचित प्रयास किए जाएंगे।