तीसा (चंबा)। जलवायु में होने वाला परिवर्तन बागवानों पर भारी पड़ सकता है। तीसा उपमंडल के अधीन आने वाले परिक्षेत्र में फरवरी माह में ही सेब के पेड़ों पर फूल आने शुरू हो गए हैं। इसे लेकर बागवानी विशेषज्ञ भी चिंतित हैं। वहीं, आगामी समय में सेब की पैदावार पर भी इसका असर पड़ने संबंधी विशेषज्ञ कयास लगा रहे हैं।
गौरतलब है कि जिला चंबा के अधीन आने वाले तीसा उपमंडल में सेब का उत्पादन किया जाता है। वहीं, बीते दिनों जिले के ऊपरी क्षेत्रों में बर्फबारी और निचले क्षेत्रों में होने वाली बारिश से इस मर्तबा सेब की अच्छी पैदावार होने के बारे में बागवानों में कुछ हद तक उम्मीद जगी थी। उन्हें आस थी कि आगामी समय में सेब के पौधों के लिए जरूरी माने जाने वाले 1400 से लेकर 1600 चिलिंग ऑवर पूरे हो जाएंगे। बावजूद इसके एक बार फिर से बागवानों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। सेब के पौधों में होने वाले अंकुरित फूल ही इसका मुख्य कारण हैं। मौसम में आने वाला यह परिवर्तन बागवानों को नुकसान पहुंचा सकता है। वहीं बागवानी विशेषज्ञों की मानें तो मौसम में आई गर्मी के कारण ही सेब के पौधों पर फूल अंकुरित हुए हैं। इसका सीधा असर आगामी दिनों में सेब की पैदावार पर पड़ेगा।
बागवान बोले-मौसम ने बढ़ाई दिक्कत
बागवानों में रमेश कुमार, सुरेंद्र सिंह, विनोद कुमार, दलीप कुमार, कृष्ण चंद, शक्ति प्रसाद, उमेश दत्त, भीम सैन, अनिल कुमार, राकेश कुमार, चरण सिंह, भगत राम, दया राम ने बताया कि बागवानी ही उनकी आर्थिकी का मुख्य साधन है। ऐसे में फरवरी माह में ही सेब के पौधों पर अंकुरित होने वाले फूलों ने उनकी दिक्कतों को बढ़ा दिया है। बीते दो वर्षों से क्षेत्र में सेब की पैदावार न के बराबर हो रही है। इससे उन्हें आगामी समय में लाभ की जगह अब नुकसान ही होगा।
इनसेट
उद्यान विभाग के विषय वाद विशेषज्ञ राजीव चंद्रा का कहना है कि तापमान बढ़ने के चलते कभी कभी ऐसा हो जाता है। समय पर ही सेब के पेड़ों पर फूल निकलें, तभी पैदावार बंपर होती है। फरवरी में फूल आना मौसम में परिवर्तन होने तथा गर्माहट होना ही इसका मुख्य कारण है।