सलूणी (चंबा)। ग्राम पंचायत सूरी और सलूणी के एक दर्जन से अधिक गांव आजादी के बाद भी सड़क से नहीं जुड़ पाए हैं। इसकी वजह से ग्रामीणों को रोजाना पांच से छह किमी पैदल सफर करना पड़ता है। ग्रामीणों के मुताबिक वह सभी स्तर पर अपनी मांग को रख चुके हैं।
मगर आज तक इस संबंध में कोई सुनवाई नहीं हुई है। इसकी वजह से ग्रामीणों में सड़क की आस भी अब टूटने लगी है। लोनिवि ने सड़क किनारे स्लोगन लिखे जाते हैं कि सड़कें हमारे भाग्य की रेखाएं है। मगर उपरोक्त पंचायतों के एक दर्जन से अधिक गांव के लिए यह भाग्य की रेखाएं अभी तक नहीं बन पाई हैं। इसको लेकर ग्रामीणों में भारी रोष है।
ग्रामीण चेत राम, सुरेंद्र, भाग चंद, कमल, सुरेश, रविंद्र, हंसराज, जगदीश, अरविंद, केवल, दिनेश और राज कुमार ने बताया कि ग्राम पंचायत सूरी और सलूणी के तहत आने वाले गांव कोटला, गुमरा, धनछू, रौण, शुकरेठी, मुंढ़ाह-एक, दो, तीन और सूरी सहित अन्य गांव अभी तक सड़क को तरस रहे हैं। सड़क न होने से ग्रामीणों को बस सुविधा तो दूर की बात है। बीमार होने पर एंबुलेंस सुविधा नहीं मिल पाती है। एंबुलेंस सेवा का लाभ लेने के लिए पहले मरीज को पालकी या पीठ पर उठाकर कई किमी पैदल चलना पड़ता है।
उन्होंने सरकार और विभाग से मांग की कि उपरोक्त गांव को सड़क से जोड़ा जाए। अधिशाषी अभियंता अरुण पठानिया ने बताया कि उपरोक्त गांव को सड़क से जोड़ने के लिए डीपीआर बन चुकी है। बाकी औपचारिकताएं पूरी की जा रही है। जल्द ही गांव को सड़क सुविधा से जोड़ा जाएगा।