चंबा। जिले में मिलने वाले अज्ञात शवों को अब मेडिकल कॉलेज के प्रशिक्षुओं के शोध के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। इसको लेकर मेडिकल कॉलेज प्रबंधन और जिला प्रशासन के बीच बैठक का आयोजन हुआ। इसमें निर्णय लिया गया कि जिले में कहीं पर भी अज्ञात शव मिलता है, तो उसे शरीर रचना कानून के तहत मेडिकल कॉलेज के प्रशिक्षुओं के इस्तेमाल को दिया जाएगा। इसके लिए तहसीलदार को प्रभारी बनाया गया है।
तहसीलदार के शव को मेडिकल कॉलेज में देने की अनुमति देंगे। इससे पहले ऐसा नहीं होता था।चंबा जिले में जब भी कोई अज्ञात शव मिलता था तो उसे पुलिस विभाग तीन दिनों तक शिनाख्त के लिए शव गृह में रखती थी। इस समयावधि में शव की शिनाख्त नहीं होने पर उसका अंतिम संस्कार कर दिया जाता था। हाल ही में भी पुलिस ने दो शवों का अंतिम संस्कार करवाया है। इसमें एक शव भिखारी का था। जबकि दूसरा अज्ञात था।
अभी तक ऐसी व्यवस्था न होने के कारण मेडिकल कॉलेज के प्रशिक्षुओं के प्रैक्टिकल के लिए प्रबंधन को बाहर से शव मंगवाना पड़ता था। मगर इस निर्णय के बाद मेडिकल कॉलेज के प्रशिक्षुओं को चंबा में ही पढ़ाई और शोध के लिए शव उपलब्ध हो पाएगा। अब कोई भी अज्ञात शव मिलेगा तो जांच पुलिस अधिकारी इसके बारे में तहसीलदार को सूचना देंगे। शिनाख्त नहीं होने की स्थिति में शव को अब मेडिकल कॉलेज के सुपुर्द किया जाएगा। मेडिकल कॉलेज प्रचार्य डॉ. अनिल ओहरी ने बताया कि अज्ञात शव को मेडिकल कॉलेज प्रशिक्षुओं के प्रैक्टिकल के लिए जिलाधीश से अनुमति मांगी गई थी। इसको लेकर प्रशासन की ओर से अनुमति मिल गई है। अब चंबा में कोई भी अज्ञात शव मिलेगा तो उसे जलाने की बजाए प्रशिक्षुओं की पढ़ाई के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।