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मरीज को पालकी पर उठाकर अस्पताल पहुंचाते हैं कोटला के ग्रामीण

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road shimla - फोटो : demo pics
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अमर उजाला ब्यूरो

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सलूणी (चंबा)। ग्राम पंचायत सलूणी के 24 गांवों के लोग आज भी सड़क सुविधा से महरूम है। हालत यह है कि लोगों को सड़क तक पहुंचने के लिए आठ किमी का पैदल सफर करना पड़ता है। सबसे अधिक परेशानी मरीज और गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने में आती है।


ऐसे में मरीजों को पालकी पर उठाकर आठ किलोमीटर पैदल चलने के बाद मुख्य सड़क तक पहुंचाया जाता है। ग्रामीण कोटला से सलूणी तक सड़क बनाने की लंबे समय से मांग कर रहे हैं। मगर सरकार और प्रशासन उनकी मांग को आज तक अनसुना कर रहा है। इसको लेकर लोगों में भारी रोष है। लोगों ने बताया कि सरकार और प्रशासन को लोगों ने सड़क बनाने के लिए कई बार ज्ञापन और प्रस्ताव भेजे। मगर आज दिन तक उन प्रस्तावों पर कोई गौर नहीं किया गया है। इसकी वजह से दो दर्जन गांव में रहने वाली 700 की आबादी सड़क सुविधा से महरूम है।
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स्थानीय निवासी चैन सिंह, योगराज, कमल कुमार, हंसराज, सुरेंद्र, टेक चंद, रवि कुमार, जितेंद्र, अमन कुमार, अमर चंद, सोभिया राम और ध्यान सिंह ने बताया कि उपरोक्त सड़क बनने से पंचायत के दो दर्जन गांव के लोगों को फायदा मिलेगी। उन्होंने बताया कि गांव में बीमार होने वाले व्यक्ति को पीठ या पालकी पर उठाकर स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाना पड़ता है। इसकी वजह से बीमार को समय पर उपचार नहीं मिल पाता।
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सबसे ज्यादा परेशानी गर्भवती को स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाने में होती है। प्रसव पीड़ा के दौरान जरा सी लापरवाही मां और बच्चे के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। सड़क बनने से मरीजों को एंबुलेंस सेवा का लाभ मिल सकता है। उन्होंने सरकार से जल्द से जल्द सड़क बनाने की मांग की है। अधिशाषी अभियंता अरुण पठानिया ने बताया कि उपरोक्त सड़क का प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेजा गया है। बजट की स्वीकृति मिलने पर सड़क का निर्माण कार्य शुरू करवाया जाएगा।

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