चुवाड़ी (चंबा)। प्रदेश के अन्य जिलों को जिला मुख्यालय से जोड़ने वाले चंबा-लाहडू़ मार्ग पर कालीघार एक बार फिर बरसात के मौसम में कहर बरपाने को तैयार है। मगर अभी तक प्रदेश सरकार और विभाग इस भूस्खलन को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा पाया है।
यह समस्या पिछले तीस सालों से चली आ रही है। मगर स्थायी समाधान के नाम पर अब तक कुछ नहीं हुआ है। हर बार बरसात से पहले यह मामला उठता है। मगर बरसात के बाद मामला फिर ठंडे बस्ते में चला जाता है। एक तरफ जहां लोक निर्माण विभाग कालीघार की पहाड़ी से हो रहे भूस्खलन को रोक नहीं पाया है तो वहीं दूसरी तरफ चुनावी वायदा करने के बाद स्थानीय विधायक विक्रम जरयाल भी कुछ खास नहीं कर पाए हैं।
बरसात के मौसम में कालीघार के समीप भारी भरकम भूस्खलन होता है। इसके चलते वाहन चालकों सहित चंबा पहुंचने वाले पर्यटकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। स्थानीय निवासी रमेंद्र सिंह, संतोष कुमार, राजकुमार, उपेंद्र कुमार, किशोर कुमार, राज सिंह, देवी चंद, ज्ञान चंद, उत्तम दास, मदन लाल, जगदीश चंद, मनोहर लाल का कहना है कि यह मार्ग काफी व्यस्त मार्ग है।
मगर बरसात में लगातार होने वाला भूस्खलन जहां घंटों जाम का कारण बनता है तो वहीं दूसरी ओर किसी बड़े हादसों को भी न्यौता देता है। चुनावों के दौरान नेताग लोगों से कालीघार का समाधान करने की बात करते हैं। मगर चुनाव जीत जाने के बाद यह मामला हर बाद गौण हो जाता है। स्थानीय लोगों ने प्रदेश सरकार से मांग की कि समस्या का चुनावी मुद्दा न बनाकर प्राथमिकता के आधार पर समाधान करने के प्रयास सरकार करें। स्थानीय विधायक विक्रम सिंह जरयाल ने बताया कि कालीघार का समाधान उनकी प्राथमिकता में शामिल है। उन्होंने कहा कि भूस्खलन को रोकने के लिए प्रोटेक्शन वर्क करवाया जाएगा। इसके लिए जल्द ही सरकार से बजट का प्रावधान करवाया जाएगा।