चंबा। जिले में पांच वर्ष से कम आयु के 325 मासूम कुपोषण की चपेट में हैं। इनमें से अति कुपोषित 48 बच्चों की जिला बाल विकास विभाग विशेष निगरानी कर रहा है। विभाग कुपोषित बच्चों को दोगुनी खुराक दे रहा है। खुराक में अंडे, दलिया समेत अन्य खाद्य चीजें शामिल हैं। विभाग के पास 277 बच्चों की सूची है जो अल्प कुपोषण के शिकार हैं। इसका खुलासा हाल ही में मासिक सर्वे में हुआ है।
पोषण अभियान के दौरान विभाग की ओर से आंगनबाड़ी केंद्र स्तर पर बच्चों का सर्वे किया गया। चंबा में कुपोषण से निपटने के लिए जिला महिला एवं बाल विकास विभाग मासिक सर्वे करवा रहा है, जिससे हर माह सूची अपडेट हो। जिले के दूरदराज के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी स्वास्थ्य कार्मिकों, आशा सहयोगियों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को कुपोषित बच्चों की पहचान कर उपचार केंद्र में उनकी जांच और पहचान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग चंबा के जिला कार्यक्रम अधिकारी बालकृष्ण शर्मा ने यह जानकारी दी है।
ये हैं कुपोषण के लक्षण
शरीर के लिए आवश्यक संतुलित आहार लंबे समय तक नहीं मिलना ही कुपोषण है। कुपोषण से बच्चों और महिलाओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, जिससे वे आसानी से बीमारियों के शिकार बन जाते हैं। कुपोषण से मांसपेशियां ढीली होना अथवा सिकुड़ जाना, कार्य करने पर शीघ्र थकान होना, चिड़चिड़ापन, घबराहट होना, चेहरा नीरस, आंखों के चारों ओर काले घेरे बनना, शरीर का वजन कम होना, कमजोरी, नींद और पाचन क्रिया का गड़बड़ाना और खासकर हाथ-पैर पतले और पेट बढ़ा होना या शरीर में सूजन आना कुपोषण के मुख्य लक्षण हैं।