डीके शर्मा
खज्जियार (चंबा)। रावमापा खज्जियार की भूमि 20 वर्ष बाद भी विभाग के नाम नहीं हो पाई है। स्कूल की भूमि अभी तक वन विभाग के नाम पर ही है। इसके चलते वहां पर विकास कार्य नहीं हो पा रहे हैं। विभाग के नाम पर भूमि नहीं होने से बजट भी स्वीकृत नहीं हो पा रहा है।
सरकार द्वारा वर्ष 1997 में राउपा खज्जियार का शुभारंभ किया गया था। जबकि, वर्ष 2006 में स्कूल का दर्जा बढ़ाया गया था। इस दौरान स्कूल में चार कमरों की व्यवस्था थी। जोकि अभी तक नहीं बढ़ पाई है। स्कूल में बच्चों की संख्या में काफी बढ़ोत्तरी हुई है। मौजूदा समय में स्कूल में 326 छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इनके बैठने के लिए चार कमरों में पूरी व्यवस्था नहीं हो पा रही है। स्कूल के बरामदे व परिसर में बच्चों की कक्षाएं लगाई जा रही हैं।
बारिश के दौरान एक कमरे में दो से तीन कक्षाएं बैठाई जाती हैं। इस दौरान छात्रों व अध्यापकों को काफी परेशानी होती है। स्कूल में कमरों की संख्या बढ़ाने को लेकर कई बार सरकार व शिक्षा विभाग को पत्र लिखे जा चुके हैं। लेकिन, अभी तक कमरों की संख्या में कोई बढ़ोत्तरी नहीं हुई है।
अभिभावकों ओम प्रकाश, कर्मचंद, धर्मचंद, चमन लाल, मनोज कुमार, अजय कुमार, अनिल, जर्म सिंह व ज्ञान चंद ने बताया कि स्कूल में अतिरिक्त कमरों की व्यवस्था न होने से छात्रों को परेशानियां उठानी पड़ रही हैं। प्रधानाचार्य श्रवण कुमार ने बताया कि स्कूल में कमरों की संख्या कम होने के बारे में उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया जा चुका है। विज्ञान विषय की कक्षाएं शुरू करने को लेकर एक वर्ष पूर्व प्रदेश सरकार ने मंजूरी दी थी। लेकिन, स्कूल में कमरों की संख्या व अध्यापक न होने से विषय शुरू नहीं हो पाया है। विज्ञान विषय में पढ़ाई करने के लिए छात्रों को चंबा या डलहौजी जाना पड़ता है, जोकि खज्जियार से काफी दूर हैं।
शिक्षा उपनिदेशक जलाल दीन ने बताया कि भूमि को विभाग के नाम पर करने की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। इसको लेकर वन विभाग से चर्चा हो चुकी है। जल्द ही भूमि विभाग के नाम हो जाएगी। ऐसा होते ही स्कूल में कमरों की संख्या बढ़ाई जाएगी। साथ ही विज्ञान विषय की कक्षाएं भी शुरू की जाएंगी।