चंबा। जिला मुख्यालय में आयोजित मेगा मॉक ड्रिल ने मेडिकल कॉलेज चंबा में इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों की दिक्कतों को बढ़ाकर रख दिया। इसकी वजह यह थी कि अस्पताल के स्ट्रेचरों को मॉक ड्रिल में भेज दिया गया था। इस वजह से अस्पताल में एक भी स्ट्रेचर न होने से तीमारदारों को मरीजों के पीठ पर उठाकर आपातकालीन कक्ष और वार्डों तक पहुंचाना पड़ा। यही नहीं इस वजह से मरीजों को एंबुलेंस की सुविधा से भी महरूम रहना पड़ा। अस्पताल प्रबंधन ने मेगा मॉक ड्रिल के आयोजन के लिए दस स्ट्रेचर दिए जाने से ही इस प्रकार की विकट परिस्थिति हुई। कुल मिलाकर वीरवार को आयोजित मेगा मॉक ड्रिल मरीजों और उनके तीमारदारों के लिए परेशानियां खड़ी करने वाली ही रही। तीमारदार अशोक कुमार, चैन सिंह, योगराज, कमल कुमार, शेर सिंह, रूपलाल, हंसराज, देवी सिंह, अमर चंद, नेकराज और देसराज ने बताया कि वीरवार को चंबा मेडिकल कॉलेज में मरीजों एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए स्ट्रेचर नहीं मिल पाए। आपातकालीन कक्ष में रखे दस स्ट्रेचरों को प्रबंधन ने मेगा मॉक ड्रिल में भेज दिया था। इन स्ट्रेचरों का इस्तेमाल आपदा से निपटने की रिहर्सल में किया गया। जबकि असलियत में मुसीबत में फंसे बीमार स्ट्रेचर के अभाव में परेशान होते रहे। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन के लिए अस्पताल में मरीजों की सहूलियत के लिए रखे उपकरणों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इसके लिए प्रशासन को अलग से व्यवस्था करनी चाहिए। ताकि आम लोगों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। उन्होंने कहा कि स्ट्रेचर के साथ एंबुलेंस भी मेगा मॉक ड्रिल में तैनात की गई थी। इसकी वजह से कई मरीजों को एंबुलेंस की सुविधा भी नहीं मिल पाई। मरीजों को निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ा।
स्ट्रेचरों अतिरिक्त व्यवस्था की थी : विनोद शर्मा
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विनोद शर्मा ने बताया कि मॉक ड्रिल के आयोजन में दस स्ट्रेचर दिए गए थे। मरीजों की सुविधा के लिए अस्पताल में और भी स्ट्रेचर मौजूद थे। शायद तीमारदारों ने स्ट्रेचर को लेकर डिमांड नहीं रखी होगी।