चंबा। चंबा शहर में चलने वाली निजी लैबों ने स्वास्थ्य विभाग के आंखों में धूल झोंकने के लिए एमबीबीएस डॉक्टर और बीडीएस के नाम की तख्ती लैबों में लटका दी है। जबकि मरीजों को दी जाने वाली रिपोर्टों पर एमबीबीएस डॉक्टर के साइन नहीं होते। लैब तकनीशियन की रिपोर्ट पर साइन कर रहे हैं। इसके साथ ही मरीज इन लैबों में टेस्ट करवाने को जाते हैं, उनसे टेस्ट के मनमाने दाम वसूले जाते हैं। जबकि इसकी कोई रसीद भी मरीज को नहीं दी जाती। मरीज टेस्ट करवाने के लिए इन लैबों में जाता है, तो उसका टेस्ट को तुरंत कर दिया जाता है। मगर उसकी रिपोर्ट पैसे की अदायगी करने के बाद दी जाती है। अगर किसी मरीज के पैसे थोड़े पैसे कम पड़ जाए। तो उसे रिपोर्ट भी नहीं दी जाती। इस तरह निजी लैब धारक लैब की आड़ में मनमानी कर रहे हैं। मगर स्वास्थ्य विभाग इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।
जो टेस्ट सरकारी लैब में पचास रुपये में होता है। निजी लैब धारक मरीज से उसके पांच सौ रुपये वसूल कर रहे हैं। केंद्र सरकार की ओर से स्वास्थ्य विभाग को निर्देश जारी किए गए हैं कि बिना एमबीबीएस के चल रही निजी लैबों के तुरंत बंद किया जाए। ताकि मरीजों की सेहत से खिलवाड़ न हो। प्रदेश में सभी जिलों में स्वास्थ्य विभाग ने बिना एमबीबीएस डॉक्टर के चल रही लैबों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। मगर चंबा में अभी तक ऐसी कोई भी कार्रवाई देखने को नहीं मिली है। मात्र स्वास्थ्य विभाग ने लैबों को पंजीकरण करवाने का नोटिस भेजकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है।
विभागीय कार्रवाई से बचने के लिए निजी लैब धारकों ने एमबीबीएस और बीडीएस के साथ समझौता कर लिया है, जो एमबीबीएस डॉक्टर लैब में मौजूद ही नहीं है। उसके नाम का सहारा लैब धारक लैब को पंजीकृत करवा रहे हैं। इसके लिए लैब धारक एमबीबीएस डॉक्टर को मासिक वेतन भी दे रहे हैं। मगर असलियत में लैब में कोई डॉक्टर मौजूद ही नहीं होता। ऐसे लैब धारकों पर विभाग की कार्रवाई होना आवश्यक है। जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर वाईडी शर्मा ने बताया कि उनके ध्यान में यह मामला नहीं है। जल्द ही इसकी पूरी जांच पड़ताल की जाएगी। ऐसा कार्य करने वाले लैब धारकों पर कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।