चंबा। जीवन में यदि कुछ कर गुजरने का पक्का इरादा हो तो परिस्थितियां मायने नहीं रखतीं। चुराह विस क्षेत्र के बौंदेड़ी निवासी मोहन लाल ने इसे साबित कर दिखाया है। मोहन ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला के 42वें दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों वेदाचार्य में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर स्वर्ण पदक व प्रमाण पत्र प्राप्त किया। मोहन ने अपनी सफलता का श्रेय अपने चाचा को दिया है।
मोहन लाल ने प्रारंभिक शिक्षा राजकीय प्राथमिक पाठशाला बौंदेडी से की। पांचवीं तक की शिक्षा हासिल करने के बाद मोहन लाल ने महर्षि दयानंद मठ चंबा में दाखिला लिया। जिसके बाद विश्वविद्यालय शिमला से निजी तौर पर वेदाचार्य किया। अमर उजाला से बातचीत में मोहन लाल ने बताया कि जब वह दूसरी कक्षा में पढ़ रहे थे तो उनकी माता का देहांत हो गया। नौंवी कक्षा में पहुंचे तो सिर से पिता का साया भी उठ गया। बौंदेड़ी विद्यालय में जेबीटी कार्यरत चाचा रूप चंद ने उन्हें सहारा दिया। इसी सहारे के बूते उन्होंने वेदाचार्य में प्रथम स्थान अर्जित किया है। मोहन ने जेबीटी धर्मशाला से की है। इसके अलावा संगीत में वह भूषण विशारद हैं। अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेले में मोहन ने मिमिकरी व एंकरिंग भी की है।