चंबा। जिला स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इसमें पता चला है कि सरकार की लाख कोशिशों के बावजूद पांगी और भरमौर में गर्भवती महिलाएं प्रसव से पूर्व स्वास्थ्य जांच के लिए अस्पताल नहीं पहुंच रही हैं। इसको लेकर स्वास्थ्य निदेशक ने बीएमओ को फटकार लगाई है। सोमवार को अस्पताल के सभागार में बीएमओ की बैठक में इस संवेदनशील मामले को लेकर गहन चर्चा की गई। बैठक की अध्यक्षता स्वास्थ्य निदेशक बलदेव ठाकुर ने की। जिला स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में पता चला है कि भरमौर में 49 और पांगी में 54 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं ने ही प्रसव से पूर्व अपने स्वास्थ्य की जांच करवाई। इसके अलावा करीब 50 फीसदी महिलाएं प्रसव से पूर्व स्वास्थ्य जांच के लिए अस्पताल पहुंची ही नहीं। जबकि बीएमओ को लक्ष्य दिया गया था कि 100 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं प्रसव से पूर्व अपनी नियमित जांच करवाएं। ताकि प्रसव के दौरान मां और बच्चे को किसी प्रकार की कोई परेशानी न हो। इसका मुख्य कारण गर्भवती महिलाओं में जानकारी का अभाव होना है। स्वास्थ्य निदेशक बलदेव ठाकुर ने बीएमओ भरमौर को निर्देश दिए कि क्षेत्र की सभी गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण करें। गर्भवती की प्रसव से पहले नियमित जांच करवाई जाए। ताकि गर्भवती और बच्चा दोनों सुरक्षित रहें। इसके लिए संबंधित आशा वर्करों से भी तालमेल बढ़ाने को कहा गया है। वहीं बीएमओ भरमौर डॉ. अश्वनी कुमार ने कर्मचारियों की कमी को इसका मुख्य कारण बताया। बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. वाइडी शर्मा, चिकित्सा अधद्धक्षक डॉ. विनोद शर्मा और जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राम कमल सहित अन्य बीएमओ मौजूद रहे।
स्वास्थ्य संस्थानों में कम हो रहे प्रसव
स्वास्थ्य निदेशक ने कहा कि कुछ वर्षों से स्वास्थ्य संस्थानों में गर्भवती महिलाओं के प्रसव कम हो रहे हैं। इसको लेकर उन्होंने निर्देश दिए कि जहां-जहां पर प्रसव की सुविधा है। वहां पर गर्भवती महिलाओं के प्रसव करवाए जाएं। इसके लिए स्टाफ नर्स को स्पेशल ट्रेनिंग करवाई जा रही है। जिन स्टाफ नर्सों ने अभी तक यह ट्रेनिंग नहीं की है। स्वास्थ्य अधिकारी ऐसी स्टाफ नर्सों को यह ट्रेनिंग करवाना सुनिश्चित करें।
हंगामे से बचने के लिए गलत आंकड़े पेश कर रहे डॉक्टर
प्रसव के दौरान मरे हुए पैदा होने वाले नवजात बच्चों को स्टिल बर्थ में नहीं डाला जाए। ऐसा होने से स्टिल बर्थ का आंकड़ा गलत हो रहा है। मौजूदा समय में देश में स्टिल बर्थ का आंकड़ा 4 प्रतिशत है। जबकि हिमाचल में यह आंकड़ा 17 प्रतिशत है। इसका मुख्य कारण मरे हुए बच्चों को स्टिल बर्थ में शामिल करना है। डॉक्टर ऐसा प्रसव के दौरान होने वाले हंगामे से बचने के लिए करते हैं। मगर ऐसा नहीं होना चाहिए।