चंबा। मेडिकल कॉलेज चंबा के डॉक्टर अब अपने मरीजों का डायलिसिस कर पाएंगे। इस संबंध में मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने फैसला लिया है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है कि क्योंकि डायलिसिस सेंटर को चलाने के लिए कोई भी डॉक्टर नहीं मिल रहा है।
हालांकि डायलिसिस सेंटर में तकनीशियन तैनात है। जो डायलिसिस करने में सक्षम में हैं लेकिन बिना एमबीबीएस डॉक्टर के तकनीशियन डायलिसिस नहीं कर सकते। इसकी वजह से चंबा के किडनी रोगियों को डायलिसिस सुविधा नहीं मिल पा रही है। मरीजों की समस्या को ध्यान में रखते हुए अस्पताल प्रबंधन ने निर्णय लिया है कि अगर कोई डॉक्टर अपने मरीज का डायलिसिस करना चाहे तो वे सेंटर में डायलिसिस कर सकता है। इसके लिए मेडिकल कॉलेज के सभी डॉक्टरों को लिखित आदेश भी जारी किए जा रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज में डायलिसिस सेंटर को खुले दो माह का समय बीत चुका है। तीन डायलिसिस मशीनें मरीजों की सुविधा के लिए स्थापित की जा चुकी है। लेकिन एमबीबीएस डॉक्टर न मिलने से सेंटर को शुरू नहीं किया जा सका है। जबकि चंबा के किडनी रोगी रोज मेडिकल कॉलेज में आकर डायलिसिस सेंटर के बारे में जानकारी लेते हैं। जिले के दर्जनों किडनी रोगी हर माह हजारों रुपये खर्च करके डायलिसिस करवाने जिला से बाहर जाते हैं। डायलिसिस सेंटर चलाने वाली कंपनी डॉक्टर को वेतन के रूप में एक लाख का ऑफर भी दे चुकी है। उसके बावजूद किसी भी डॉक्टर ने हामी नहीं भरी है। जब तक सेंटर में कोई स्थायी डॉक्टर नियुक्त नहीं हो जाता, तब तक प्रबंधन उपरोक्त निर्णय के तहत मरीजों को डायलिसिस सुविधा देगा।
निजी सेंटरों में डायलिसिस करवाने की एवज में चार से पांच हजार रुपये अदा करने पड़ते हैं। जबकि मेडिकल कॉलेज चंबा में डायलिसिस आरंभ होने पर मरीज को एक हजार 98 रुपये मरीज का भुगतान ही करना पड़ेगा।
एमएस डॉ. विनोद शर्मा ने कहा कि किडनी रोगियों को डायलिसिस सुविधा देने के लिए यह निर्णय लिया है। इसको लेकर सभी डॉक्टरों को जल्द ही आदेश भी जारी कर दिए जाएंगे। कोई भी डॉक्टर अपने मरीज का डायलिसिस करना चाहे तो वह सेंटर में उसका डायलिसिस कर सकता है।