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मेडिकल कॉलेज में हीमोफिलिया मरीजों को दी जा रही मुफ्त दवाई

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drugs - फोटो : demo pics
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प्रवीण कुमार

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चंबा। प्रदेश में चल रहे मेडिकल कॉलेजों में से चंबा अकेला ऐसा मेडिकल कॉलेज है जहां पर हीमोफीलिया बीमारी का उपचार हो रहा है। इस बीमारी के उपचार में दी जाने वाली दवाई महंगी है। इसे सरकार और स्वास्थ्य विभाग मरीजों को उपलब्ध नहीं करवा पा रहे हैं। इसके अलावा इस बीमारी का अभी तक कोई स्थायी इलाज भी नहीं है। वैज्ञानिक अपने स्तर पर बीमारी का तोड़ निकालने में लगे हैं।

यह बीमारी एक अनुवांशिक बीमारी है। जोकि बच्चे को उनके माता-पिता से मिलती है। इस बीमारी में शरीर में रक्त के थक्के बनने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है, जिसके कारण चोट लगने पर रक्त जम नहीं पाता और वह असामान्य रूप से बहता रहता है। ऐसा होने पर समय पर मरीज को फैक्टर-9 का डोज नहीं दिया जाए। तो मरीज की खून बहने से मौत भी हो सकती है।
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इस बीमारी पर तब तक लोगों का ध्यान नहीं जाता, जब तक कि उन्हें किसी कारण से गंभीर चोट न लगे और उनमें रक्त का बहना न रुकें। फैक्टर-9 के एक डोज की कीमत करीब डेढ़ लाख रुपये है। इसे हर कोई नहीं खरीद पाता। इसकी वजह से गरीब परिवार से संबंध रखने वाले मरीज उपचार नहीं करवा पाते। चंबा जिले में चार बच्चे इस बीमारी से ग्रसित हैं। इनका उपचार चंबा मेडिकल कॉलेज में चल रहा है। दो सगे भाई तीसा तो दो सगे भाई सलूणी क्षेत्र से संबंधित हैं।

हीमोफिलीया सोसायटी ऑफ इंडिया उपलब्ध करवा रही दवाई
चंबा मेडिकल कॉलेज को यह दवाई हीमोफिलीया सोसायटी ऑफ इंडिया उपलब्ध करवा रही है। अस्पताल प्रबंधन को इसके लिए कोई शुल्क नहीं चुकाना पड़ रहा। जबकि प्रदेश के अन्य मेडिकल कॉलेजों में मरीजों को यह दवाई नहीं मिल रही है। इस दवाई का निर्माण विदेशों में होता है, और इसकी कीमत भी ज्यादा होती है। इसकी वजह से कोई भी केमिस्ट इस दवाई को अपनी दुकान में नहीं रखता।

हीमोफिलिया के लक्षण
अगर कोई व्यक्ति हीमोफिलिया का शिकार है तो उसकी मांसपेशियों और जोड़ों में रक्त स्राव हो सकता है साथ ही कोई हरकत करने पर दर्द भी महसूस हो सकता है। कभी-कभी सूजन और सूजन वाली जगह को छूने पर गर्माहट का भी अहसास हो सकता है। हीमोफिलिया से पीड़ित रोगी के दिमाग में भी रक्तस्त्राव है। बिना किसी कारण के, नाक से खून निकलना, मूत्र या मल में खून आना, शरीर में चोट के बड़े निशान का बनना हीमोफीलिया के लक्षण हैं।
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चार बच्चों का चंबा में हो रहा उपचार: डॉ. विनोद शर्मा
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विनोद शर्मा ने बताया कि चंबा मेडिकल कॉलेज में चार बच्चों का इलाज चल रहा है। उन्हें नियमित रूप से हीमोफिलिया दवाई की डोज दी जा रही है। इस डोज को एक संस्था उपलब्ध करवा रही है।

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