चंबा। प्रदेश सरकार ने 17 मेडिकल अफसरों की तैनाती के आदेश निकाले, लेकिन आकांक्षी जिले को एक भी डॉक्टर नहीं मिला। सरकार ने सिर्फ सिरमौर, कांगड़ा, हमीरपुर, शिमला और मंडी जिले को राहत दी। वहीं, 50 फीसदी डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे मेडिकल कॉलेज सहित जिले के अन्य स्वास्थ्य संस्थानों को कुछ नहीं मिला है। इसको लेकर जिले के लोगों में भारी रोष है।
लोगों का कहना है कि चंबा की तुलना में अन्य जिलों के स्वास्थ्य संस्थानों में डॉक्टरों की संख्या बेहतर है। बावजूद इसके सरकार इस जिले में डॉक्टरों की तैनाती करने में खासा दिलचस्पी नहीं ले रही है। हैरानी इस बात की है कि सरकार ने जब ऑर्डर निकाले तो इस जिले से चुने हुए नुमाइंदों को भी नहीं पूछा गया। न ही ये नुमाइंदे सरकार को डॉक्टरों की तैनाती के लिए बाध्य कर पाएं।
कमल कुमार, प्रहलाद, सोम नाथ, जय सिंह, अरविंद, मुकेश कुमार और अमर सिंह ठाकुर ने बताया कि चंबा के स्वास्थ्य संस्थानों की क्या हालत है। इससे मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री सहित स्वास्थ्य सचिव भी परिचित हैं। सबकुछ जानने के बाद भी इस जिले को नजरअंदाज करना समझ से परे है। सरकार को बने हुए तीन वर्ष का समय बीत चुका है, लेकिन जिले के स्वास्थ्य संस्थानों में डॉक्टरों की कमी थोड़ी भी दूर नहीं हो पाई है।
भरमौर विधायक डॉ. जनकराज ने बताया कि व्यवस्था परिवर्तन वाली सरकार में आकांक्षी जिले को तीन साल से नजरअंदाज किया जा रहा है। भरमौर अस्पताल में जो डॉक्टरों की तैनाती हुई थी, उसके लिए उन्होंने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। अन्यथा सरकार वहां भी डॉक्टर भेजने को तैयार नहीं थी।