चांजू (चंबा)। चंबा में अपनी बहन चामुंडा माता से मिलने के बाद बैरवाली माता वापिस चुराह पहुंच गई। हालांकि बैरवाली माता अभी तक अपने मूल निवास स्थान बैरागढ़ स्थित मंदिर तक नहीं पहुंची है। यहां पर वह 14 मई को पहुंचेगी। इस दिन मंदिर में विशेष पूजा अर्चना का आयोजन होगा। माता के लौटने पर दर्शन करने वाले भक्तों की मंदिर में काफी भीड़ रहेगी। बुधवार को माता के पद चिन्हों की शोभायात्रा बघेईगढ़ पहुंची।
यहां पर भक्त माता के पद चिन्हों को विशेष आमंत्रण पर अपने-अपने घरों में लेकर गए। मान्यता है कि बैरवाली माता के पद चिन्हों की शोभा यात्रा जिस घर में जाती है, वहां पर माता रानी सुख-समृद्धि की वर्षा करती है। 25 दिन पहले बैरवाली माता पुरानी परंपरा के अनुसार सौ किमी दूर चंबा में स्थित चामुंडा माता से मिलने गई। मंदिर का पुजारी प्रेम सिंह ने बताया कि बैरागढ़ से माता की शोभा यात्रा पैदल ही चंबा को जाती है।
चंबा में चामुंडा माता से मिलने के बाद शोभा यात्रा पैदल ही वापिस लौटतीं है। इस दौरान माता की शोभा यात्रा रास्ते में आने वाले सभी क्षेत्रों को अपने दर्शन देते हुए जाती हैं। उन्होंने कहा कि 14 तक बैरवाली माता के चुुराह के विभिन्न इलाकों में जाकर भक्तों को अपने दर्शन देगी। जबकि 14 को वापिस बैरागढ़ मंदिर में चली जाएगी।