‘मुझे दूर मत ब्याहना बापू’ कविता से किया मंत्रमुग्ध
कला सृजन पाठशाला ने बसंत पंचमी के मौके पर रचना-पाठ का किया आयोजन
अमर उजाला ब्यूरो
चंबा। इरावती होटल चंबा में कला सृजन पाठशाला द्वारा बसंत पंचमी के मौके पर सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जयंती एवं सामाजिक-मीडिया विषयक आयोजन सत्र-3 में रचना-पाठ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर निराला की कुछ श्रेष्ठ रचनाओं का पाठ किया गया। साथ ही सोशल-मीडिया विषय पर युवा रचनाकारों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। कार्यक्रम का संचालन चंबा कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. संतोष कुमार ने किया। कार्यक्रम में डॉ. संतोष कुमार ने निराला के जीवन प्रसंगों और उनकी कविताओं के महत्व पर प्रकाश डाला। इसके अलावा छिंदू कुमार ने निराला का व्यक्तित्व परिचय, विशाली कुमारी ने सोशल मीडिया पर कविता, युवा लेखिका पारुल जसरोटिया ने अपने लेख में सोशल मीडिया के महत्व का जिक्र किया। चंपू कुमार ने निराला की रचनाओं का परिचय प्रस्तुत किया। मनोज कुमार ने मैं और मेरी निराशा शीर्षक कविता पढ़कर सभी को भावुक कर दिया। शिल्पा कुमारी ने निराला की विश्व प्रसिद्ध कविता वर दे वीणा का पाठ किया। गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल चंबा की बारहवीं कक्षा की छात्रा नेहा कुमारी ने निराला की बसंत कविता का गान प्रस्तुत किया। नेहा ने बसंत पंचमी पर कविता पाठ किया। इसके उपरांत संजय कुमार ने निराला की काव्य दृष्टि पर प्रकाश डाला। इसके बाद अध्यक्ष शरत शर्मा ने कुमार कृष्ण की कविता उठो गुरमीत बेदी उठो और निर्मला पुतुल की कविता, मुझे दूर मत ब्याहना बापू का पाठ करके मंत्रमुग्ध कर दिया।
बलदेव कुमार ने निराला के ऊपर अपने विचार रखे। इसके बाद युवा कवि हेमराज ने बसंत पंचमी पर सस्वर कविता का पाठ किया। युवा प्रोफेसर डॉ. उज्ज्वल कटोच ने मां सरस्वती वंदना का गान किया। युवा साहित्यकार सोमी प्रकाश भुवेटा ने राहत इंदौरी की शायरी से अपने वक्तव्य का आगाज किया और पत्रकारिता जीवन से संबंधित निजी संस्मरणों को प्रस्तुत करके आपस में सांझा किया। वरिष्ठ कवि भूपेंद्र सिंह जसरोटिया ने संगीत के ऊपर बहुत रोचक कविता का पाठ किया। इस कविता में उन्होंने बताया कि संगीत सुनते हुए मैं खुद को खुदा के नजदीक मानता हूं, और पाता भी हूं।