चंबा। जिले में कशमल के दोहन को लेकर 16 लोगों ने रुचि दिखाई है। इन लोगों ने कृषि उपज मंडी चंबा से रोजगार के लिए कशमल निकालने के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से आवेदन कर विधिवत लाइसेंस प्राप्त कर लिए हैं। लाइसेंस वन विभाग की ओर से चयनित सरकारी भूमि से कशमल निकालने के लिए दिए गए परमिट के आधार पर जारी किए गए हैं।
कृषि उपज मंडी की ओर से स्पष्ट किया गया कि वन विभाग से अनुमति मिलने और सभी आवश्यक दस्तावेजों की जांच के बाद ही लाइसेंस जारी किए गए हैं। उल्लेखनीय है कि कशमल, जिसे वैज्ञानिक भाषा में बर्बेरिस एरिस्टाटा कहा जाता है, एक महत्वपूर्ण औषधीय पौधा है, जो हिमालयी क्षेत्रों में पाया जाता है। इसकी जड़, छाल और फल आयुर्वेदिक दवाओं में उपयोग किए जाते हैं। पीलिया, मधुमेह, आंखों के संक्रमण और लीवर संबंधी रोगों में इसे बेहद लाभकारी माना जाता है।
कशमल में बर्बेरीन नामक तत्व पाया जाता है, जो एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-ऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होता है। हालांकि, अवैध कटाई के चलते यह औषधीय पौधा दुर्लभ होता जा रहा है। इसे संरक्षित करने के लिए सरकार और वन विभाग प्रयासरत हैं।
चुराह उपमंडल के अंतर्गत आने वाले कुछ क्षेत्रों में बिना अनुमति कशमल के अवैध दोहन की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। वहीं, कल्हेल पंचायत के अधीन क्षेत्रों में ग्रामीण अपने स्तर पर दिन-रात पहरेदारी कर कशमल के अवैध दोहन को रोकने में जुटे हैं। ऐसे में अब वन विभाग की चयनित भूमि के अलावा निजी भूमि से अवैध रूप से कशमल निकालने वालों पर सख्ती तय मानी जा रही है।
कशमल निकालने के लिए कृषि उपज मंडी से लाइसेंस लेना अनिवार्य है। इसके लिए आवेदक को पैन कार्ड, आधार कार्ड और वन विभाग में पंजीकृत फर्म के दस्तावेजों के साथ कृषि उपज मंडी में आवेदन करना होता है। दस्तावेजों की जांच पूरी होने के बाद लाइसेंस जारी किया जाता है। इसी के तहत 16 लोगों को सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद लाइसेंस जारी कर दिए गए हैं। भानू प्रताप, सचिव, कृषि उपज मंडी चंबा