अमर उजाला ब्यूरो
चंबा। बरसात का मौसम शुरू होते ही जिले के नौनिहाल डायरिया की चपेट में आना शुरू हो गए हैं। पंडित जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के शिशु वार्ड में इन दिनों डायरिया ग्रसित बच्चों की संख्या काफी बढ़ गई है। शिशु वार्ड में पचास से अधिक बच्चे डायरिया से ग्रसित हैं। जबकि, सोमवार को बीस बच्चों को उपचार के बाद छुट्टी कर दी गई। शिशु रोग जांच ओपीडी में रोजाना 20 से 25 बच्चे ऐसे आ रहे हैं। जोकि डायरिया से ग्रसित हैं। ज्यादा बीमार बच्चों को डॉक्टर अस्पताल में भर्ती कर रहे हैं। मामूली रूप से बीमार बच्चों को दवाइयां देकर घर भेजा जा रहा है।
डायरिया में बच्चों को दिन भर में तीन या उससे भी अधिक बार पानी की तरह पतले दस्त होते हैं। इसके अलावा कई बार बुखार और उल्टी एक साथ होने की शिकायत भी रहती है। ऐसे में बच्चों में पानी और पोषक तत्वों की कमी होने के साथ-साथ अधिक कमजोरी भी हो जाती है। इसकी वजह से बच्चे की तबीयत ज्यादा खराब हो जाती है। ऐसे में अभिभावकों को बच्चा डॉक्टर से जांच के लिए ले जाना चाहिए। सर्दी-जुकाम और बुखार की तरह डायरिया भी आम, लेकिन गंभीर समस्या है। गर्मी और बरसात के मौसम में इसका प्रकोप सबसे ज्यादा होता है। इसके पीछे अहम कारण गंदगी है।
यह है डायरिया के लक्षण
डायरिया हाने पर पेट में दर्द, सूजन, पेट में मरोड़, वजन घटना, बुखार, मल में रक्त आना, लगातार उल्टी होना, शरीर में दर्द, बार-बार प्यास लगना, डिहाइड्रेशन और सिरदर्द होना मुख्य लक्षण है।
कुछ दिनों से अस्पताल में बढ़े डायरिया के मरीज : डॉ. विशाल
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. विशाल महाजन ने बताया कि चंबा मेें पिछले कुछ दिनों में डायरिया के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। इससे बचने के लिए अभिभावकों को बच्चों को उबला पानी और साफ भोजना करवाएं। बच्चे को गंदगी से दूर रखना चाहिए।