चंबा। जिले में कृषि विभाग के 213 स्वीकृत पदों में से 134 लंबे समय से रिक्त हैं। 74 कृषि प्रसार अधिकारियों में से सिर्फ नौ ही कार्यरत हैं। इससे किसानों को समय पर तकनीकी सहायता, बीज और दवाइयों के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। विभागीय योजनाएं भी धरातल तक नहीं पहुंच पा रही हैं।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि ये पद लगातार 2023 से खाली पड़े हैं, लेकिन न नई नियुक्तियां हुईं और न ही अस्थायी व्यवस्था की गई।
जानकारी के अनुसार जिले में कृषि प्रसार अधिकारियों (एग्रीकल्चर एक्सटेंशन ऑफिसर) के कुल 74 स्वीकृत पद हैं, इनमें 65 पद रिक्त हैं। स्थिति यह है कि एक अधिकारी को तीन से चार उपकेंद्रों का अतिरिक्त भार संभालना पड़ रहा है, जिससे विभागीय कामकाज प्रभावित हो रहा है और किसानों की मुश्किलें बढ़ रही हैं।
वहीं, एडीओ स्तर पर भी हालात बेहद खराब हैं। कृषि विकास अधिकारी के 26 स्वीकृत पद, 20 रिक्त और सिर्फ छह अधिकारी पूरा जिला संभाल रहे हैं।
किसानों और कर्मचारियों का कहना है कि जिले के अधिकतर लोग कृषि पर निर्भर है। स्टाफ की भारी कमी का सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है। बीज और दवाइयों के लिए लंबा इंतजार बढ़ रहा है, योजनाओं की जानकारी समय पर नहीं मिल पा रही है। खेतों का निरीक्षण नहीं हो रहा और फसल संबंधी समस्या पर तत्काल मार्गदर्शन नहीं मिल पा रहा है।
स्टाफ की कमी के बारे में उच्चाधिकारी को अवगत करवाया गया है। स्टाफ की कमी बावजूद किसानों को दिक्कतें न हो, इसलिए समय पर बीज की खेप पहुंचाई जाती है। डॉ. भूपेंद्र सिंह, उपनिदेशक, कृषि विभाग, चंबा