चंबा। जिले के 133 हेल्थ वेलनेस सेंटरों को चलाने का जिम्मा 33 सीएचओ ( कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर) पर है। इसकी वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को इन सेंटरों का लाभ नहीं मिल पा रहा है। प्रदेश सरकार ने कुुछ वर्ष पहले वाहवाही लूटने के लिए भले ही स्वास्थ्य उप केंद्रों का दर्जा बढ़ाकर इन्हें हेल्थ वेलनेस सेंटर बना दिया है, लेकिन वहां पर स्टाफ को तैनात करने की व्यवस्था नहीं की। 50 से अधिक सेंटर ऐसे हैं, जहां पर ताला लटका रहता है। एक सीएचओ के कंधों पर चार से पांच सेंटरों का कार्यभार है।
इसकी वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हो रही हैं। ग्रामीण और स्वास्थ्य विभाग कई बार सरकार से यहां सीएचओ की तैनाती करने की मांग कर चुके हैं, लेकिन अभी तक उनकी मांग को पूरा नहीं किया गया है।
हेल्थ एवं वेलनेस सेंटर पर सीएचओ साधारण बीमारियों की ओपीडी देख सकते हैं। इसके अलावा आयुष, योग और काउंसलिंग कर सकते हैं। इतना ही नहीं हेल्थ वेलनेस सेंटर पर 25 से 30 तरह के टेस्ट की भी सुविधा रहती है, लेकिन जिला चंबा के सभी सेंटरों में सीएचओ की तैनाती नहीं होने से ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को ये सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। सबसे ज्यादा परेशानी गर्भवतियों को टीकाकरण करवाने में हो रही है।
इन सेंटरों में गर्भवतियों और छोटे बच्चों का टीकाकरण करने की व्यवस्था होती है, लेकिन स्टाफ की कमी के कारण टीकाकरण के लिए उन्हें दर बदर भटकना पड़ रहा है। इन सेंटरों में विभाग के एनसीडी के तहत चल रहे कार्यक्रमों को लेकर भी लोगों को जानकारी दी जाती है। गांव में कौन व्यक्ति किस बीमारी से पीड़ित है, इस बारे में भी विभाग को सीएचओ के माध्यम से जानकारी दी जाती है, लेकिन सेंटरों में सीएचओ न होने से विभाग को इसकी भी सही जानकारी नहीं मिल पा रही है।
-जिले के 133 हेल्थ वेलनेस सेंटरों में 33 सीएचओ तैनात हैं। विभाग ने सरकार को सेंटरों में चल रही सीएचओ की कमी के बारे में अवगत करवा दिया है। - करण हितैषी, जिला कार्यक्रम अधिकारी