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विदेशी अार्किटेक्ट तैयार करेंगे चंबा के ऐतिहासिक मंदिरों के मॉडल

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अमर उजाला ब्यूरो

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चंबा। चंबा के एतिहासिक और पौराणिक मंदिरों को विदेशी ऑर्किटेक्ट की मदद से संरक्षित करने की योजना बनाई गई है। इसके लिए इंटैक (इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट कल्चरल हेरीटेज) की राज्य संयोजक माल्विका पठानिया को रिसर्च करने के लिए एक साल की अनुमति मिली है। वह विदेशी ऑर्किटेक्ट एवं प्रोफेसर जेरल गोजर के साथ मिलकर इस कार्य को अंजाम दे रही हैं। उनकी टीम चंबा के आठ एतिहासिक और पौराणिक मंदिरों का चयन करेगी। इसके बाद इन मंदिरों पर एक साल तक गहनता से अध्ययन किया जाएगा। इसमें मंदिरों की बनावट से लेकर निर्माण सामग्री का पूरा खाका तैयार किया जाएगा। मंदिर का निर्माण कब हुआ। पत्थर कितने समय पुराना है। रिसर्च में इन सभी बातों पर शोध की जाएगी। इस रिसर्च में कई मंदिर जो दसवीं शताब्दी के बताए जाते हैं। सातवीं या आठवीं शताब्दी के भी हो सकते हैं।

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इंटैक (इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट कल्चरल हेरीटेज) की राज्य संयोजक माल्विका पठानिया ने बताया कि चंबा जिले से उनका काफी पुराना नाता है। इसलिए अपने रिसर्च अभियान की शुरूआत उन्होंने चंबा से ही की है। चंबा में ऐसे कई ऐतिहासिक और पुराने मंदिर हैं जोकि दसवीं शताब्दी से भी पुराने हैं। इन मंदिरों का रिसर्च के दौरान विशेष मॉडल तैयार किए जाएंगे। इस मॉडल का फायदा यह होगा कि जब कभी भूकंप की चपेट में आने से मंदिर क्षतिग्रस्त होंगे तो उसे पुराने मूलरूप में तैयार किया जा सकेगा। जोकि मौजूदा समय में संभव नहीं है। इस प्रकार का मॉडल बनाने के लिए जो सॉफ्टवेयर चाहिए, वह सिर्फ उपरोक्त विदेशी प्रोफेसर के पास है। इसे उन्होंने अपने स्टूडेंट के साथ मिलकर तैयार किया है। एक मंदिर का मॉडल तैयार करने के लिए उसकी कैमरे के जरिये विभिन्न भागों से कम से कम 800 फोटो खींची जाएगी। इन फोटो को सॉफ्टवेयर के जरिये जोड़कर मंदिर का मॉडल तैयार होगा। ताकि भविष्य में मंदिर का कोई भाग क्षतिग्रस्त होता है, तो मॉडल के जरिये उसे वैसा ही हूबहू बनाया जा सके। इस मौके पर पद्मश्री विजय शर्मा समेत अन्य लोग भी मौजूद रहे।

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