फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

भजोत्रा व नड्डल के तीन दर्जन गांव आज भी सड़क से महरूम

विज्ञापन
village shimla - फोटो : demo pic
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन

चंबा। सरकारें चाहे विकास की कितनी बड़ी-बड़ी बातें करती हो, मगर जमीन पर हकीकत कुछ और ही है। इसका अंदाजा इससे ही लगाया जा सकता है कि जिले की कई पंचायतें आज भी सड़क जैसी मूलभूत सुविधा से महरूम है।
ग्राम पंचायत भजोत्रा और नड्डल के तीन दर्जन गांव आजादी के बाद भी सड़क से नहीं जुड़ पाए हैं। इससे इन गांवों में रहने वाली 6000 आबादी को आज भी पैदल ही अपना सफर तय करते हैं। सबसे ज्यादा परेशानी मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने में आती है। इन ंचायतों से सड़क की दूरी करीब चार किलोमीटर है। ऐसे में बीमार व्यक्ति को पीठ और पालकी में बिठाकर मोड़ा गांव तक पहुंचाना पड़ता है। यहां से आगे वाहन के माध्यम से मरीज को अस्पताल तक पहुंचाया जाता है। इस दौरान कई मरीज बीच रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। इसके साथ ही गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने में भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। हालांकि हर विधानसभा चुनाव में इन पंचायतों को सड़क से जोड़ने का मुद्दा खूब उछलता है। इसमें दोनों पार्टियों के नेता लोगों से बड़े-बड़े वायदे करते हैं। मगर चुनाव बीत जाने के बाद कोई भी गांव की तरफ मुड़कर नहीं देखता। यही कारण है कि ये पंचायतें आज तक सड़क सुविधा से नहीं जुड़ पाई हैं। हालांकि सरकार योजनाओं की बात करें तो 100 से ज्यादा आबादी वाले गांव को सड़क सुविधा से जोड़ा जाना चाहिए। मगर इन योजनाओं की पोल चंबा जिला के इन क्षेत्रों में खुलकर सामने आ रही है।
विज्ञापन


इन गांव तक आज तक नहीं पहुंची सड़े
ग्राम पंचायत भजोत्रा और नडल के खडकोता, हला, दिघाला, गतका, सगोटी, संजोगा, बेलणू, खलोह, बरोड, रणहोटी, सिरोटी, भोता, जीण, कोठा, मटवाड़, जुतरण, सरेई, थल, डोरी वन, बलांज और करेरी गांव के लोग आज भी सड़क सुविधा से महरूम है। यहां लोग लंबे समय से सड़क की मांग कर रहे हैं। इसको लेकर लोगों में भारी रोष है।
ग्रामीण राज कुमार, मान सिंह, टेक चंद, रूपलाल, प्यार सिंह, कमल कुमार, जितेंद्र, हंसराज, भूपेंद्र सिंह, केवल, देवी प्रसाद, सुुनील कुमार और शक्ति प्रसाद ने बताया कि सड़क सुविधा न होने से उनके गांव में विकास नहीं हो पा रहा है। लोगों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस बार होने वाले विस चुनाव में सड़क का मुद्दा जोर शोर से उठाया जाएगा।

सरकार व जिला प्रशासन को भेजे ग्राम सभा प्रस्ताव
पंचायत प्रतिनिधियों ने गांव को सड़क से जोड़ने के लिए कई बार ग्राम सभा में प्रस्ताव पास किए। इन प्रस्तावों को स्वीकृति के लिए सरकार और प्रशासन को भी भेजा। मगर आज दिन तक उन प्रस्तावों के पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। यही कारण है कि उपरोक्त गांव अभी तक सड़क से नहीं जुड़ पाए हैं।


वन विभाग से मांगी गई है एनओसी
अधिशाषी अभियंता अरुण पठानिया ने बताया कि पंचायतों को सड़क से जोड़ने के लिए औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। वन विभाग से एनओसी मांगी गई है। एनओसी मिलने पर आगामी कार्रवाई की जाएगी।

सड़क को जोड़ने के लिए कांग्रेस जिम्मेवार
भाजपा नेता डीएस ठाकुर ने बताया कि पंचायतों तक सड़क नहीं पहुंचने के लिए पूर्ण रूप से कांग्रेस जिम्मेवार है। कांग्रेस ने सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा को लेकर बड़े वायदे किए। मगर गांव को सड़क से जोड़ने में नाकाम रहे।
विज्ञापन


कोट्स
विधायक आशा कुमारी ने बताया कि उनके विधानसभा क्षेत्र में सड़कों का जाल बिछाया गया है। पंचायतों के लिए सड़क स्वीकृत है। विभागीय औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। उनके पूरा होने पर पंचायतों को सड़क से जोड़ दिया जाएगा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें