हिमाचल में दूसरे राज्यों की वोल्वो बसों के संचालन से केंद्र को फायदा जबकि हिमाचल को घाटा हो रहा है। प्रदेश सरकार की ओर से इन बसों का संचालन रोकना मुश्किल है। केंद्र सरकार की नीति के अनुसार यह ऑपरेटर ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट का तीन लाख रुपये टैक्स जमा कराकर देश में कहीं भी पर्यटकों व सवारियों को ले जा सकते हैं। प्रदेश सरकार सिर्फ इन ऑपरेटरों से एसआरटी ले सकती है। सरकार वोल्वो बसों का संचालन रोकने का यह मामला केंद्र सरकार के समक्ष उठाने जा रही है।
प्रदेश सरकार ने सभी आरटीओ को अवैध वोल्वो संचालन को रोकने के निर्देश दिए हैं। पर्यटन स्थल कुल्लू, मनाली, डल्हौजी, धर्मशाला, शिमला से दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, जम्मू व अन्य धार्मिक स्थलों को सवारियां ले जाने के लिए दर्जनों वोल्वो बसें सुबह ही खड़ी हो जाती हैं। इन बसों का किराया परिवहन निगम की वोल्वो बसों से कम है। ऐसे में लोग भी इनमें सफर करने के लिए आगे आते हैं। यहीं नहीं, वोल्वो बसों के मालिक सवारियों के चाय, पानी का खर्चा भी खुद उठाते हैं। जानकारी के मुताबिक हिमाचल में प्रति वोल्वो से परिवहन निगम को 15 हजार रुपये का चूना लग रहा है। इन बसों से हर महीने यह रकम लाखों में होती है।
उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने बताया कि हिमाचल में दूसरे राज्यों से कई बसें हिमाचल आती हैं। केंद्र सरकार की नीति के तहत 3 लाख रुपये जमा कराने के बाद यह ऑपरेटर कहीं भी जा सकते हैं। ऐसे में इनका संचालन रोकना मुश्किल हो रहा है। सरकार इन ऑपरेटरों से सिर्फ एसआरटी ले सकती है। हिमाचल सरकार इस मामले को केंद्र से उठाएगी।