इस राशि से प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल, कचरा प्रबंधन जैसी बुनियादी सुविधाओं का विकास होगा। केंद्र की इस अनुदान राशि का उपयोग स्थानीय निकायों द्वारा दो तरह की बुनियादी सेवाओं के लिए किया जाएगा। पहला, घरेलू अपशिष्ट, मानव मल, मल कीचड़ प्रबंधन और उपचार सहित खुले में शौच से मुक्ति दिलाने वाले कार्य कराए जाएंगे, जिससे गांव में स्वच्छता बढ़ेगी। बंधित अनुदान की राशि से जो दूसरे काम होंगे, उनमें पीने के पानी की आपूर्ति, वर्षा जल संचयन और जल पुनर्चक्रण को प्राथमिकता दी जाएगी। हर पंचायत जहां तक संभव हो, इन दोनों महत्वपूर्ण सेवाओं में से प्रत्येक के लिए इन अनुदानों का आधा हिस्सा खर्च करेगी, लेकिन, जिस पंचायत ने एक श्रेणी की जरूरतों को पूरा कर लिया है, वह दूसरी श्रेणी के लिए भी उस धन का उपयोग कर सकती है। पंचायतीराज मंत्री अनिरूद्ध सिंह ने 15वें वित्त आयोग की अनुशंसा पर प्रदेश को राशि मिलने की पुष्टि की है।