शायद कम ही लोग जानते होंगे कि हमारे राष्ट्रगान 'जन गण मन...' की धुन हिमाचल प्रदेश के एक स्वतंत्रता सेनानी ने बनाई थी। हालांकि इस धुन के रचयिता आज हिमाचल में ही उपेक्षित और गुमनाम हैं।
गुमनामी की इस चादर के अंदर झांकने की हिमाचल सरकार ने भी कोशिश नहीं की। बात हो रही है राष्ट्रगान की धुन के रचयिता एवं महान स्वतंत्रता सेनानी कैप्टन राम सिंह ठाकुर की।
15 अगस्त 1914 को धर्मशाला के चीलगाड़ी में जन्मे राम सिंह का बाल्यकाल धौलाधार की गोद में बसे खनियारा गांव में गुजरा।
बचपन में जानवर के सींग से वाद्य यंत्र बनाकर सुर निकालने वाले राम सिंह 1922 में 14 साल की उम्र में गोरखा ब्वॉय कंपनी में भर्ती हुए। ब्रिटिश सेना में सेवाएं देने के बाद वह नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज में आ गए।
द्वितीय विश्वयुद्ध में अपनी वीरता का प्रदर्शन कर कई मेडल उन्होंने जीते।
तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के अनुरोध पर राम सिंह उत्तर प्रदेश में सब इंस्पेक्टर के रूप में लखनऊ आए और पीएसी के बैंड मास्टर बने। 15 अप्रैल, 2002 को उन्होंने अंतिम सांस ली।
राष्ट्रगान की धुन की रचना का सफर
अपने सैन्य सफर में कैप्टन राम सिंह ठाकुर ने कदम कदम बढ़ाए जा... जैसे कई देशभक्ति गीतों की धुनें बनाईं।
15 अगस्त 1947 को कैप्टन राम सिंह के नेतृत्व में आईएनए (इंडियन नेशनल आर्मी) के आर्केस्ट्रा ने लाल किले पर शुभ सुख चैन की बरखा बरसे...गीत की धुन बजाई।
यह गीत रविंद्रनाथ टैगोर के जन गण मन... का हिंदी अनुवाद था।
इसे कुछ संशोधनों के साथ नेताजी ने खास सलाहकारों के साथ लिखा था। इसकी धुन बनाई थी कैप्टन राम सिंह ठाकुर ने। कौमी तराना नाम से यह गीत आजाद हिंद फौज का राष्ट्रीय गीत बना।
इस गीत की धुन को बाद में जन गण मन... की धुन के रूप में प्रयोग किया गया। इस तरह से हमारे राष्ट्रगान की धुन राम सिंह जी की ओर से बनाई गई।
राम को नहीं मिला सम्मान
कैप्टन राम सिंह ठाकुर को वह सम्मान नहीं मिल पाया जिसके वह हकदार थे। उनके पैतृक गांव में उनका पुश्तैनी घर आज भी है। इसे उनके रिश्तेदार संभाल रहे हैं।
लेकिन, इसे विडंबना ही कहा जाएगा कि यहां इतनी बड़ी शख्सियत की याद में एक अदद स्मारक तक नहीं है। हिमाचल सरकार ने घोषणाओं के सिवाय कभी कुछ नहीं किया।
सरकार की खनियारा में राम सिंह मेमोरियल पार्क बनाने की घोषणा महज भाषण तक सीमित रह गई। सामुदायिक भवन के लिए पैसा तो मिला लेकिन जमीन नहीं मिल पाई।
राम सिंह ठाकुर मेमोरियल विकास समिति के पदाधिकारियों भगवान सिंह गुरंग, शिवराज थापा, नवीन गुरंग, लव कुमार क्षेत्री, विजय भंडारी, रमेश मस्ताना और जगदीश चंद का कहना है कि स्थानीय लोगों के सहयोग से वर्ष 2006 से महान स्वतंत्रता सेनानी की याद में कैप्टन राम सिंह ठाकुर मेमोरियल फुटबाल टूर्नामेंट शुरू किया गया। इसे सरकार का सहयोग नहीं मिला।
गुड़गांव में रह रहे कैप्टन राम सिंह ठाकुर के पुत्र रमेश ठाकुर कहते हैं कि उनके पिता को सरकार से वह सम्मान नहीं मिला जिसके वह हकदार थे।