हिमाचल में सरकारी नियुक्ति या प्रमोशन के मामले में किसी प्रकार की छूट देने पर लगी रोक हट गई है। धर्मपाल बनाम श्रीकांत बाल्दी केस में राज्य उच्च न्यायालय ने यह रोक दिसंबर 2011 में लगाई थी।
इसी आधार पर कार्मिक विभाग ने 16 दिसंबर 2011 को जारी निर्देशों में सभी महकमों को इस रोक का पालन करने को कहा। लेकिन अब इस केस के निपटारे के बाद कोर्ट ने यह रोक हटा दी है।
महाधिवक्ता कार्यालय ने कार्मिक विभाग को 16 दिसंबर 2011 को जारी निर्देश वापस लेने की सलाह दी है।
शिक्षा विभाग में तैनात नेत्रहीन तबला वादक धर्मपाल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि उसे रेगुलर करने के लिए सरकार छूट देने से इनकार कर रही है, जबकि वह प्रमोशन की पात्रता रखते हैं।
तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश कुरियन जोसेफ और न्यायाधीश राजीव शर्मा की खंडपीठ ने अगले आदेशों तक राज्य में किसी भी कर्मचारी या अधिकारी को नियुक्ति, नियमितिकरण या प्रमोशन के मामले में उम्र, पात्रता और सेवाकाल से संबंधित किसी प्रकार की छूट देने पर रोक लगा दी थी। पिछले दो साल से राज्य में इस प्रकार की छूट नहीं दी गई।
सारा रिकार्ड देखने और शिक्षा विभाग के जवाब के बाद इस केस का निपटारा हो गया। लेकिन छूट देने पर लगी रोक को लेकर स्थिति स्पष्ट न होने के कारण शिक्षा सचिव ने महाधिवक्ता कार्यालय से पत्र के जरिए जवाब चाहा।
इस पर उप महाधिवक्ता राममूर्ति बिष्ट ने सरकार को जवाब दिया है कि अंतिम फैसले के साथ ही यह रोक हट गई है। इसलिए कार्मिक विभाग अपने इन निर्देशों को वापस ले सकता है। प्रधान सचिव (कार्मिक) एसकेबीएस नेगी ने बताया कि इस बारे में जल्द नए निर्देश जारी हो रहे हैं।
कैबिनेट दे सकता है छूट
भर्ती एवं पदोन्नत्ति नियमों में किसी भी तरह की छूट देने का अधिकार मंत्रिमंडल के पास है। लेकिन जब से इस केस के कारण रोक लगी थी, कैबिनेट ने कोर्ट के साथ टकराव से बचने के लिए ऐसा कोई केस स्वीकार नहीं किया।
इस रोक से सरकारी धन की बचत भी हो रही है, इसलिए इस अवधि में वित्त विभाग ने भी रोक के नाम पर कई फाइलें रोकी।
ऐसे पड़ रहा था असर?
स्वास्थ्य विभाग में पदोन्नत्ति नियमों की शर्त पूरी न करने के कारण पिछले तीन निदेशक एडहाक रहे, क्योंकि इससे पिछले पद पर उनका निर्धारित सेवाकाल पूरा नहीं हो रहा था।
मत्स्य विभाग में पूर्व निदेशक की सेवानिवृत्ति के बाद नया निदेशक लगाने के लिए वन टाइम छूट चाहिए थी। अन्य विभागों में भी कर्मचारी पदोन्नत्ति को लेकर ऐसे सैकड़ों केस हैं।