सभी मंडियों में स्थानीय इलाकों से आने वाले मटर की सप्लाई बंद हो गई है। गत वर्ष जहां 19 जुलाई तक ढली सब्जी मंडी में 1,01,611 क्विंटल मटर की खेप पहुंची थी, वहीं इस वर्ष 19 जुलाई तक 1,08,912 क्विंटल मटर का कारोबार हो चुका है। इस मंडी में इस सीजन में सबसे ज्यादा मटर करसोग से आया। इसके अलावा ठियोग, फागू, टुटू, मशोबरा, सुन्नी, जुन्गा से भी मटर ढली मंडी में पहुंचता है। हालांकि इस वर्ष पराला मंडी में मटर के कारोबार में गिरावट आई है। पराला मंडी में गत वर्ष जहां 502 क्विंटल मटर की खेप पहुंची थी, वहीं इस वर्ष कारोबार 72 क्विंटल मटर की फसल में ही सिमट गया। वहीं रामपुर मंडी में इस वर्ष भी गत वर्ष के समान कारोबार हुआ है। हालांकि नेरवा और ठियोग मंडी में कारोबार में बढ़ोतरी हुई है।
एपीएमसी के आंकड़ों के अनुसार जिले की सभी मंडियों में अभी तक 1,27,030 क्विंटल मटर की सप्लाई पहुंची है। वहीं गत वर्ष 19 जुलाई तक 1,13,251 क्विंटल मटर का ही कारोबार हुआ था। सितंबर से नवंबर तक आंकड़ा करीब दो लाख तक पहुंच जाएगा। जिले की मंडियों से हर वर्ष मटर की सप्लाई बंगलूरू, पूणे, मुंबई, अहमदाबाद और दिल्ली भेजी जाती है। बाहरी राज्यों में हिमाचल की मटर को गुणवत्ता के अनुसार ज्यादा अच्छा माना जाता है। ढली सब्जी मंडी आढ़ती एसोसिएशन के सचिव बिट्टु वर्मा ने बताया कि सभी क्षेत्रों से मटर बेहतर गुणवत्ता वाला ही आया है।
इस वर्ष जिले में मटर की बंपर पैदावार हुई है। गत वर्ष के मुकाबले 13,779 क्विंटल ज्यादा मटर का कारोबार हुआ है। उम्मीद है कि सितंबर, अक्तूबर और नवंबर में चलने वाले सीजन में किसानों को फसल के और ज्यादा बेहतर दाम मिलेंगे। -देवानंद वर्मा, चेयरमैन, एपीएमसी शिमला-किन्नौर