मरीज निजी लैबों में भारी दाम में एक्सरे कराने को मजबूर
आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को करना पड़ रहा परेशानी का सामना
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं(बिलासपुर)। सिविल अस्पताल घुमारवीं में हड्डी रोगों से संबंधित बड़े आकार का एक्स-रे न होने के कारण मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल की बड़ी एक्स-रे मशीन लंबे समय से खराब पड़ी हुई है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन अब तक इस समस्या का समाधान नहीं कर पाया है।
इस लापरवाही का खामियाजा गरीब, मध्यम और निम्न वर्ग के मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। इलाज के लिए सरकारी अस्पताल आने वाले मरीजों को मजबूरी में निजी अस्पतालों और लैब का रुख करना पड़ रहा है, जहां एक साधारण एक्स-रे के लिए 500 से 600 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार अस्पताल में स्थापित यह एक्स-रे मशीन वर्ष 2003 की है। समय रहते न तो मशीन को बदला गया और न ही किसी वैकल्पिक व्यवस्था पर ध्यान दिया गया। हाल ही में अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञ की तैनाती होने के बाद मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ, जिससे मशीन पर दबाव बढ़ा और आखिरकार वह पूरी तरह से खराब हो गई। दुखद पहलू यह है कि कई दिन बीत जाने के बावजूद तकनीकी खराबी को ठीक नहीं कराया गया है। अब मरीजों को साधारण लेकिन जरूरी एक्स-रे के लिए भी बाहर जाना पड़ रहा है। महंगाई के इस दौर में, जहां दवाइयों के दाम पहले ही आम आदमी की जेब पर भारी पड़ रहे हैं, ऐसे में निजी लैबों पर निर्भरता मरीजों की कमर तोड़ रही है।
लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों का उद्देश्य आम जनता को सस्ता और सुलभ इलाज उपलब्ध कराना होता है, लेकिन यहां हालात इसके ठीक उलट हैं। मरीज सरकारी अस्पताल में पर्ची कटवाकर भी जांच के लिए बाहर महंगे दाम चुकाने को मजबूर हैं। लोगों में स्वास्थ्य विभाग की इस लापरवाही को लेकर भारी रोष है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि या तो खराब पड़ी एक्स-रे मशीन को तुरंत ठीक कराया जाए या फिर नई और आधुनिक मशीन की व्यवस्था की जाए। समय रहते समाधान न होने पर इसे गरीब मरीजों के अधिकारों पर सीधा हमला माना जाएगा।
कोट
इस संबंध में वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी घुमारवीं मंजीत ठाकुर ने बताया कि उन्हें इस विषय में फिलहाल पूरी जानकारी नहीं है। खंड चिकित्सा अधिकारी छुट्टी पर हैं और वही इस बारे में बेहतर जानकारी दे सकते हैं।