भाषा एवं संस्कृति विभाग व हिम कला संगम की ओर से हुआ कार्यक्रम
लोक संस्कृति से जुड़ाव और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए किया प्रेरित
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। भाषा एवं संस्कृति विभाग कार्यालय बिलासपुर और हिम कला संगम के संयुक्त तत्वावधान में 5 से 7 अगस्त तक संस्कृति भवन के सभागार में लोकनृत्य, लोकगीत, धुपु गायन व संस्कार गीत कार्यशालाओं का आयोजन किया गया। कार्यशाला के दूसरे दिन कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला भाषा अधिकारी नीलम चंदेल ने की। शुभारंभ मां सरस्वती की वंदना व दीप जलाकर किया गया।
कार्यशाला में महिला मंडलों और बच्चों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। पनौल कुरलाग, हडसर पनौल, भंजवाणी, दनोह, कंदरौर, बेनला, विष्णु, धार टटोह, नौणी, बखैल, सोलग जुरासी और बड़ोल देवी, पनोह सहित विभिन्न महिला मंडलों के करीब 120 महिलाओं व 30 बच्चों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस दौरान प्रतिभागियों को सुहाग, भ्यागड़ा, घोड़ी, त्योहार और फसल गीत जैसे संस्कार गीत सिखाए गए। वहीं लोकनृत्य में बिलासपुरी गिद्दा ने सभी को विशेष रूप से आकर्षित किया। नीलम चंदेल ने कहा कि लोक संस्कृति में संस्कार गीतों और लोकनृत्य का महत्वपूर्ण स्थान है। उन्होंने बताया कि भरतमुनि के नाट्यशास्त्र में लोक नृत्य का उल्लेख मिलता है। लोक गीत और संस्कार गीत न केवल मनोरंजन का साधन हैं, बल्कि ये हमें हमारी पहाड़ी संस्कृति से भी जोड़ते हैं। साथ ही, लोक साहित्य समाज में नैतिकता और आचार-व्यवहार के मूल्यों के प्रति प्रेरित करता है। प्रशिक्षक के रूप में आकाशवाणी से स्वरपरित कलाकार सुभाष गुप्ता, कौशल्या देवी, सुलोचना देवी, कमल ठाकुर, मनोरमा देवी, अंजू, भगवान दास, अंजना देवी, रेनु बाला, सीता देवी, रवीन्द्र चंदेल कमल, सुरम सिंह ऊना, अभिषेक और कश्मीरा देवी मौजूद रहे। इसके अलावा हिम कला संगम के अध्यक्ष सतपाल शर्मा, मुकेश कुमार, नरेश शर्मा, मनीष कुमार, अखिलेश कुमार, प्यारी देवी, कौशल्या देवी और अंकित कुमार भी कार्यक्रम में शामिल हुए।