एम्स बिलासपुर में सेफ इन्फ्यूजन प्रैक्टिसेज विषय पर आयोजित कार्यशाला में मौजूद नर्सिंग ऑफिसर व
नर्सिंग कौशल और रोगी सुरक्षा पर विशेषज्ञों ने दिया जोर
नए मानकों और स्मार्ट पंप तकनीक पर प्रदान किया व्यावहारिक प्रशिक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। एम्स बिलासपुर के कॉलेज ऑफ नर्सिंग द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता और रोगी सुरक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। संस्थान के मेडिकल एजुकेशन यूनिट में सेफ इन्फ्यूजन प्रैक्टिसेज विषय पर दूसरी एक दिवसीय कार्यशाला हुई। कार्यशाला में नर्सिंग अधिकारियों और प्रशिक्षुओं को इन्फ्यूजन (ड्रिप व इंजेक्शन) से जुड़ी आधुनिक तकनीकों और सुरक्षा मानकों की विस्तृत जानकारी दी गई।
कार्यशाला का मुख्य केंद्र बिंदु 2024 आईएनएस (इन्फ्यूजन नर्सेज सोसाइटी) स्टैंडर्ड ऑफ प्रैक्टिस के नवीनतम अपडेट्स रहे। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को बताया कि साक्ष्य-आधारित प्रक्रियाओं को अपनाकर न केवल मरीजों के उपचार को बेहतर बनाया जा सकता है, बल्कि अस्पताल में होने वाले संक्रमणों के खतरे को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है। सत्र के दौरान वेसल हेल्थ और प्रिजर्वेशन पर विशेष जोर दिया गया, ताकि लंबी अवधि तक उपचार ले रहे मरीजों की नसों को सुरक्षित रखा जा सके। इसके साथ ही, रक्त प्रवाह में होने वाले संक्रमण की रोकथाम और इन्फ्यूजन के दौरान आने वाली रुकावटों को दूर करने के लिए नवीनतम प्रोटोकॉल साझा किए गए। एसेप्टिक नॉन-टच तकनीक और हब डिसइन्फेक्शन के जरिए जीरो इंफेक्शन लक्ष्य पर चर्चा, दवाओं की सटीक मात्रा सुनिश्चित करने के लिए स्मार्ट पंप के सुरक्षित संचालन का अभ्यास, चुनौतीपूर्ण स्थितियों में डिफिकल्ट आईवी एक्सेस प्राप्त करने की उन्नत तकनीक सिखाई गईं।
विशेषज्ञों की देखरेख में हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग स्टेशनों पर नर्सिंग स्टाफ ने कौशल का प्रदर्शन किया। कार्यशाला के समापन पर विशेषज्ञों ने दोहराया कि नर्सिंग अभ्यास में उत्कृष्टता और निरंतर सीखना ही रोगी सुरक्षा की असली कुंजी है। इस आयोजन के माध्यम से एम्स बिलासपुर ने स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय मानकों को लागू करने की अपनी प्रतिबद्धता को एक बार फिर पुख्ता किया है।