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मंदिरों का सरकारीकरण नहीं, समाजीकरण करेंगे : विहिप

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घुमारवीं में धर्म रक्षा अर्पण निधि कार्यक्रम में बोले डॉ. सुरेंद्र जैन, मंदिरों को मुक्त करने का अभियान शुरू
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थूक से प्रसाद अपवित्र करने वालों को मिले कठोर सजा, उच्च स्तरीय न्यायिक जांच की मांग


संवाद न्यूज एजेंसी

ऋषिकेश (बिलासपुर)। अब मंदिरों का सरकारीकरण नहीं बल्कि समाजीकरण होगा। यह बात सरस्वती विद्या मंदिर घुमारवीं में आयोजित धर्म रक्षा अर्पण निधि कार्यक्रम में विहिप के केंद्रीय संयुक्त महामंत्री डॉ. सुरेंद्र कुमार जैन ने कही।
उन्होंने कहा कि मंदिरों की संपत्तियों और आय का सरकारें दुरुपयोग कर रही हैं। इन मंदिरों को मुक्त कर समाज और संतों को सौंपने का समय आ गया है। कार्यक्रम की अध्यक्षता पुरुषोत्तम शर्मा ने की जबकि मंच पर प्रांत मंत्री तुषार डोगरा, प्रांत उपाध्यक्ष विमला अंगीरस, संगठन मंत्री प्रेम शंकर, हिमाचल शिक्षा वार्ड अध्यक्ष सुरेश सोनी, विभाग अध्यक्ष इंदर डोगर, कैप्टन विजयपाल, एमएस ठाकुर, दिनेश पंडित, सरिता शर्मा, सुनीता देवी और अमरदेव मौजूद रहे। डॉ. जैन ने हाल ही में प्रसाद और सब्जियों को थूक से अपवित्र करने की घटनाओं पर कड़ा रोष जताते हुए दोषियों के खिलाफ उच्च स्तरीय न्यायिक जांच और कठोर सजा की मांग की।
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उन्होंने कहा कि यह महापाप केवल हिंदू समाज ही नहीं, पूरे देश के खिलाफ अपराध है। संविधान के नाम पर सरकारें वर्षों से हिंदुओं के धार्मिक स्थलों पर कब्जा करती रही हैं, जबकि अल्पसंख्यकों को उनके धार्मिक अधिकार पूर्ण रूप से प्राप्त हैं। यह भेदभाव अब स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि संजौली और मंडी की घटनाओं ने देश को चेताया है। अब लव जिहाद, थूक जिहाद, जनसंख्या जिहाद जैसे षड्यंत्रों को सहन नहीं किया जाएगा। उन्होंने दो टूक कहा कि विश्व हिंदू परिषद अब मंदिरों की स्वतंत्रता के लिए एक बड़ा आंदोलन शुरू करने को तैयार है।
उन्होंने कहा कि भारत हिंदू राष्ट्र था, है और रहेगा। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विहिप कार्यकर्ता और स्थानीय लोग उपस्थित रहे।
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