-झील में दलदल बढ़ने से रद्द करनी पड़ी राज्य स्तरीय रिवर राफ्टिंग प्रतियोगिता
-सालों से लंबित है मंडी भराड़ी से लुहणू तक बैराज बनाने की योजना
-पानी का स्तर कम होने के कारण 12 की जगह 3 माह ही हो रही गतिविधियां
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। गोबिंद सागर झील के जलस्तर में तेजी से गिरावट आने के कारण यहां हाल ही में शुरू की गई वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियां बंद करनी पड़ी हैं। जलस्तर कम होने और दलदल बढ़ने से इस बार राज्य स्तरीय रिवर राफ्टिंग प्रतियोगिता भी रद्द करनी पड़ी। झील में वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियां शुरू होने से जहां लोगों को उम्मीद जगी थी कि यहां पर पर्यटक रुकेगा और रोजगार के अवसर बढेंगे। वहीं झील में कारोबार करने वाले व्यवसायियों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
बीते दिनों वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियों के चलते सुर्खियों में रही गोबिंद सागर झील अब सुनसान हो गई है। यहां न ही वाटर स्पोर्ट्स से संबंधित कोई गतिविधि हो रही हैं और न ही पर्यटक बिलासपुर रुक रहा है। पर्यटकों को आकर्षित करने वाली गोबिंद सागर झील इस बार तय समय से पहले ही सूखने लगी है। गोबिंद सागर झील बिलासपुर में 9 मार्च को प्रदेश स्तरीय रिवर राफ्टिंग प्रतियोगिता प्रस्तावित थी। इसमें प्रदेश भी की आठ टीमों ने भाग लेना था। लेकिन अब एसोसिएशन इस प्रतियोगिता के लिए दूसरा स्थान चिन्हित कर रही है। झील के जलस्तर में गिरावट से न सिर्फ वाटर स्पोर्ट्स बंद हो गए, बल्कि जिले में पर्यटन बढ़ाने की संभावनाओं पर भी पानी फिर गया है। प्रशासन ने पहले यहां वाटर स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने के लिए पैरासेलिंग, स्पीड बोटिंग और अन्य जलक्रीड़ा गतिविधियां शुरू की थीं, लेकिन पानी कम होते ही यह सभी बंद करनी पड़ीं। पैरासेलिंग बोट के मालिकों को अपने उपकरण वापस ले जाने पड़े, जबकि क्रूज, शिकारे और जेटी की राइड भी पूरी तरह ठप हो गई हैं। झील में जलस्तर बनाए रखने के लिए कई वर्ष से बैराज निर्माण की योजना लंबित है। पूर्व की भाजपा सरकार ने ऐतिहासिक मंदिरों को लिफ्ट करने की 1500 करोड़ की परियोजना में मंडी भराड़ी पुल से लुहणू तक बैराज बनाने की भी योजना रखी थी। लेकिन प्रदेश में सरकार बदली और सब कागजों तक ही सीमित रह गया।
यदि यह बैराज समय पर बन जाता, तो यहां साल भर वाटर स्पोर्ट्स और अन्य पर्यटन गतिविधियां सुचारू रूप से चलतीं। स्थानीय कारोबारियों का कहना है कि यदि बैराज का निर्माण जल्द नहीं हुआ, तो आने वाले समय में झील और तेजी से सूखेगी और यहां पर वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियां साल भर की बजाए दो से तीन माह ही चल पाएंगी। झील का जलस्तर कम होने से स्थानीय पर्यटन व्यवसायियों को बड़ा नुकसान हुआ है। शिकारा और बोट ऑपरेटरों के अलावा कई छोटे व्यवसायी भी इससे प्रभावित हुए हैं।
इनसेट
झील में पानी का स्तर कम होने के कारण वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियां बंद हो गई हैं। इससे कंपनी को हर माह करीब 10 लाख का नुकसान उठाना पड़ रहा है। झील में पानी भरने के बाद ही इन्हें फिर से शुरू किया जाएगा।
अजय हांडा, एमडी हिमालयन एडवेंचर कंपनी