दोहरी यात्रा का झंझट, समय और पैसे दोनों की बर्बादी
समिति ने उठाई मांग, सरकाघाट व कांगड़ा से भराड़ी होकर चलें बसें
मांग पूरी नहीं हुई तो लोगों को साथ लेकर किया जाएगा आंदोलन
संवाद न्यूज एजेंसी
भगेड़ (बिलासपुर)। किरतपुर–नेरचौक फोरलेन से होकर गुजरने के बावजूद यहां से शिमला के लिए सीधी बस सेवा अब तक शुरू न होना स्थानीय ग्रामीणों की सबसे बड़ी मांग बन गई है। भगेड़, पनोह, औहर, भंजवानी, बैहना-जट्टां, बेरी-दडोलां, ऋषिकेश और भराड़ी पुल जैसे गांवों के लोगों को शिमला जाने के लिए पहले बिलासपुर आना पड़ता है।
वहां से दूसरी बस पकड़नी होती है। ग्रामीणों की इस समस्या को जिला ग्रामीण भाखड़ा विस्थापित सुधार समिति ने गंभीर चिंता का विषय बताया है। समिति अध्यक्ष देशराज शर्मा ने कहा कि हजारों लोगों की दिनचर्या इस दोहरी यात्रा से प्रभावित हो रही है। लोगों को जहां अतिरिक्त समय देना पड़ता है, वहीं किराए का खर्च भी दोगुना हो रहा है। उन्होंने कहा कि यह समस्या केवल परिवहन सुविधा की कमी नहीं, बल्कि ग्रामीणों की दिन-प्रतिदिन की पीड़ा बन गई है। समिति ने सुझाव दिया है कि सरकाघाट और कांगड़ा से शिमला को जाने वाली कुछ लंबी दूरी की बसों को किरतपुर–नेरचौक फोरलेन से होते हुए मंडी–भराड़ी मार्ग पर मोड़ा जाए। इससे न केवल गांवों के लोगों को सीधी सुविधा मिलेगी, बल्कि यह फोरलेन का बेहतर उपयोग भी होगा। देशराज शर्मा ने कहा कि यदि सरकार और परिवहन विभाग ने समय रहते ग्रामीणों की इस मांग पर ध्यान नहीं दिया, तो समिति चरणबद्ध आंदोलन शुरू करने को विवश होगी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि लोगों के सब्र का बांध अब टूटने के कगार पर है और यदि जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ, तो सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया जाएगा।