बिलासपुर। जिला अस्पताल में फर्जी तरीके से वैक्सीन लगाने के मामले में जांच शुरू हो गई है। सीएमओ बिलासपुर ने एमओएच परविंद्र शर्मा को जांच अधिकारी बनाया है। अमर उजाला ने 27 मई के अंक में इस मामले को प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद विभाग ने इस पर संज्ञान लिया है।
जिले में मेडिकल शॉप पर काम करने वाले लोगों को फ्रंट लाइन वर्कर घोषित करने के बाद वैक्सीन लगाई जा रही है। इसी का फायदा उठाते हुए जिला अस्पताल में अपने चहेतों को 26 मई को फर्जी तरीके से वैक्सीन लगवाई जा रही थी। बुधवार को स्वास्थ्य विभाग के एक कर्मचारी ने एक मेडिकल स्टोर से फॉर्म लेकर एक युवती जो 22 साल की है उसे कोविड वैक्सीन लगवाई थी। न ही वो फ्रंट लाइन वर्कर है और न ही किसी मेडिकल शॉप पर काम करती है। इसके अलावा मिली जानकारी के अनुसार एक केमिस्ट के पूरे परिवार को वैक्सीन लगाई गई है। जिस फॉर्म पर वैक्सीनेशन की गई उस पर मेडिकल स्टोर की ही स्टैंप लगी थी। जबकि मेडिकल शॉप पर काम करने वाले वर्कर को वैक्सीन लगाने के लिए ड्रग इंस्पेक्टर की मोहर होनी आवश्यक है। अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद विभाग हरकत में आया है। इस संबंध में जांच के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं। एमओएच परविंद्र ने कहा कि उन्हें जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। जांच शनिवार से शुरू की जाएगी।