घुमारवीं में निष्पक्षता पर सवाल, भाजपा–कांग्रेस समर्थक ठेकेदार आमने-सामने
पुलिस की मौजूदगी में ही दोनों पक्षों के बीच होती रही तीखी नोकझोंक
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं(बिलासपुर)। घुमारवीं स्थित वन विभाग के आईडीपी (इंटीग्रेटेड डिविजन प्रोजेक्ट) कार्यालय में शनिवार को टेंडर प्रक्रिया को लेकर भारी हंगामा हुआ। टेंडर की निष्पक्षता और राजनीतिक भेदभाव के आरोपों ने माहौल को इतना तनावपूर्ण बना दिया कि पुलिस को मौके पर बुलाना पड़ा।
जानकारी के अनुसार, शनिवार को टेंडर दाखिल करने की अंतिम तिथि थी। कुछ ठेकेदारों ने आरोप लगाया कि वे समय पर कार्यालय पहुंचे, लेकिन वहां कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था। जब उन्होंने अधिकारियों से संपर्क किया तो जवाब मिला कि कर्मचारी जरूरी कार्य से बाहर गए हैं। ठेकेदारों का कहना है कि इससे उन्हें निर्धारित समय पर टेंडर जमा करने का मौका ही नहीं मिला।
मौके पर मौजूद कुछ ठेकेदारों ने आरोप लगाया कि कांग्रेस समर्थक ठेकेदारों ने कार्यालय का दरवाजा बंद कर दिया और भाजपा समर्थक ठेकेदारों को अंदर प्रवेश करने से रोका। इससे दोनों गुटों में तीखी बहस हुई, जो देखते ही देखते धक्का-मुक्की में बदल गई। स्थिति की जानकारी मिलने पर पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र गर्ग अपने समर्थकों के साथ कार्यालय पहुंचे। उन्होंने कहा कि भाजपा विचारधारा से जुड़े ठेकेदारों को डराने-धमकाने और टेंडर प्रक्रिया से बाहर रखने का प्रयास किया गया, जबकि कांग्रेस समर्थक ठेकेदारों को बिना किसी रोकटोक के टेंडर फार्म उपलब्ध कराए गए। गर्ग ने चेतावनी दी कि भाजपा समर्थित ठेकेदारों के साथ इस तरह का अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विवाद बढ़ने पर पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। पुलिस की मौजूदगी में ही दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक होती रही, जिससे माहौल काफी देर तक तनावपूर्ण रहा। करीब शाम पांच बजे सहायक परियोजना अधिकारी कार्यालय पहुंचीं। जब उनसे पूरे दिन की अनुपस्थिति का कारण पूछा गया, तो उन्होंने बताया कि उन्हें जिला परियोजना अधिकारी कार्यालय बिलासपुर बुलाया गया था। हालांकि, बिलासपुर कार्यालय में जिला परियोजना अधिकारी सौरव जाखड़ ने कहा कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि सहायक परियोजना अधिकारी को किस कार्य के लिए बुलाया गया था। पूर्व मंत्री राजेंद्र गर्ग ने वन विभाग के अधिकारियों से मांग की कि सभी ठेकेदारों को समान अवसर देने के लिए मौजूदा टेंडर प्रक्रिया को रद्द कर नई तिथि घोषित की जाए। उनका कहना है कि सरकारी दफ्तर में इस तरह का भेदभाव लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है। फिलहाल पुलिस ने स्थिति को काबू में कर लिया है और मामले की जांच जारी है। ठेकेदारों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच और नई टेंडर तिथि की घोषणा नहीं की गई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।