करीब दो साल तक चली सुनवाई के बाद सत्र न्यायालय ने दिया फैसला
2023 में ग्राम पंचायत सिहड़ा में व्यक्ति की संदिग्ध हालात में हुई थी मौत
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिले में 2023 में दर्ज चर्चित संदिग्ध के मौत मामले में सत्र न्यायालय बिलासपुर ने शुक्रवार को अहम फैसला सुनाते हुए आरोपी को बरी कर दिया। अभियोजन पक्ष हत्या का आरोप संदेह से परे साबित करने में नाकाम रहा, इसलिए आरोपी को संदेह का लाभ दिया गया है। गवाहों के उलझे बयान, कमजोर सबूतों से सेशन कोर्ट से हत्या के आरोपी को राहत मिली है।
2023 में बिलासपुर के ग्रामीण इलाके ग्राम पंचायत सिहड़ा में एक व्यक्ति की संदिग्ध मौत के बाद मृतक के परिजन ने युवक पर हत्या का आरोप लगाया था। शिकायत पर दर्ज केस की जांच की और आरोपी को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया। पुलिस ने अदालत में 30 से अधिक दस्तावेज और नौ भौतिक साक्ष्य पेश किए। इनमें दस्तावेजी साक्ष्य में एफआईआर, कई सीजर मेमो, डिमार्केशन रिपोर्ट, जमाबंदी की प्रति, घटनास्थल का नक्शा, गिरफ्तारी मेमो, इन्क्वेस्ट रिपोर्ट, सीडी और फोटोग्राफ शामिल रहे। गवाहों के बयान भी दर्ज थे। आरोपी से जुड़ी नौ वस्तुएं भी कोर्ट में दी थीं। अभियोजन का तर्क था कि घटनास्थल से मिले ये सबूत आरोपी को सीधे हत्या से जोड़ते हैं। बचाव पक्ष ने कहा कि यह पूरी तरह परिस्थितिजन्य मामला है। कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं है और पेश किए गए सबूत आरोपी की संलिप्तता साबित नहीं करते। उन्होंने दो तस्वीरें पेश कर जांच में खामियों की ओर इशारा किया और कहा कि पुलिस ने केवल अनुमान के आधार पर पंकज को फंसाया।
सत्र न्यायाधीश ने फैसले में कहा कि गवाहों के बयान एक-दूसरे से मेल नहीं खाते। घटनास्थल से मिले कपड़े और अन्य वस्तुओं का आरोपी से स्पष्ट संबंध साबित नहीं हुआ। फॉरेंसिक रिपोर्ट भी हत्या का ठोस सबूत पेश नहीं कर पाई। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि भारतीय न्याय सिद्धांत के अनुसार संदेह का लाभ आरोपी को दिया जाना चाहिए। इन सभी आधारों पर अदालत ने आरोपी को हत्या के आरोप सहित अन्य सभी आरोपों से बरी कर दिया। करीब दो साल तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने कहा कि पुख्ता साक्ष्य के अभाव में किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।