फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bilaspur News: गालियां पंचायत में कच्ची सड़कें लोगों को दे रहीं परेशानी

Sat, 23 May 2026 11:48 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
विज्ञापन
विज्ञापन
झंडूता विकास खंड के सेर सहित कई बस्तियों में नहीं पक्की सड़क
विज्ञापन

ग्रामीण बोले,अब सिर्फ वादे नहीं, धरातल पर दिखना चाहिए काम

संवाद न्यूज एजेंसी
झंडूता(बिलासपुर)। झंडूता विकास खंड की ग्राम पंचायत गालियां में इस बार पंचायत चुनाव में कच्ची सड़कों की समस्या सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बनकर उभर रही है। गांव की छोटी-छोटी बस्तियों में पक्की सड़कें न होने के कारण ग्रामीणों को रोजाना भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। धूल-मिट्टी उड़ने से जहां लोगों का आवागमन प्रभावित हो रहा है, वहीं इसका सीधा असर स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या सिर्फ असुविधा नहीं बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी का संघर्ष बन चुकी है। कहना है कि हर चुनाव में प्रत्याशी गांव पहुंचकर विकास के बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही हालात जस के तस रह जाते हैं। कई ग्रामीणों ने यह भी कहा कि वर्षों से केवल आश्वासन मिल रहे हैं, जबकि जमीन पर कोई ठोस बदलाव नहीं दिखा। सेर गांव सहित आसपास की कई बस्तियों में अधिकतर संपर्क मार्ग आज भी कच्चे हैं। इन रास्तों पर चलना आसान नहीं बल्कि जोखिम भरा हो गया है। स्कूली बच्चों को रोजाना स्कूल पहुंचने में देर होती है और कई बार उन्हें कीचड़ में गिरकर चोट भी लग जाती है। बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए यह स्थिति और भी कठिन है। ग्रामीणों ने बताया कि कई बार मरीजों को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सका, क्योंकि रास्ते की हालत बेहद खराब है। बरसात के मौसम में हालात और विकट हो जाते हैं, जब पूरे रास्ते कीचड़ और फिसलन से भर जाते हैं। ऐसे में पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है और दोपहिया वाहन अक्सर फंस जाते हैं। कई बार ग्रामीणों को मजबूरी में कई किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि सड़क की समस्या ने गांव के विकास को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। खेती-बाड़ी के सामान की ढुलाई से लेकर दैनिक जरूरतों तक हर काम प्रभावित होता है। अब लोगों में यह भावना साफ दिख रही है कि इस बार वोट उसी उम्मीदवार को दिया जाएगा, जो केवल वादे नहीं करेगा बल्कि सड़क निर्माण को प्राथमिकता देकर काम शुरू करवाएगा। ग्रामीणों ने कहा कि वे अब विकास के नाम पर केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि जमीन पर बदलाव देखना चाहते हैं।
विज्ञापन

इनसेट
नीलम कुमारी ने कहा कि गांव की सबसे बड़ी समस्या कच्ची सड़कें हैं। हर बार चुनाव में नेता आते हैं, मीठी-मीठी बातें करते हैं और फिर गायब हो जाते हैं। बच्चों को स्कूल भेजना मुश्किल हो जाता है, कई बार वे कीचड़ में गिरकर कपड़े खराब कर लेते हैं। अब लोग थक चुके हैं और बदलाव चाहते हैं।
इनसेट
शशि पाल ने कहा कि हमारे गांव में मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना बहुत बड़ा कठिन काम है। कई बार एंबुलेंस रास्ते में फंस जाती है और लोगों को कंधों पर उठाकर ले जाना पड़ता है। यह स्थिति बहुत गंभीर है और अब इसका समाधान जरूरी है।
इनसेट
राजेंद्र शर्मा ने कहा कि पिछले कई वर्ष से सड़क की मांग उठाई जा रही है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। चुनाव के समय सब सक्रिय हो जाते हैं, लेकिन बाद में कोई नजर नहीं आता। अब ग्रामीणों ने तय कर लिया है कि काम करने वाले को ही वोट मिलेगा।
विज्ञापन

इनसेट
प्यारो देवी ने कहा कि बरसात में हालत बहुत खराब हो जाती है। घर से बाहर निकलना भी मुश्किल हो जाता है। बुजुर्गों को संभालना बहुत कठिन हो जाता है। हमें अब ऐसे प्रतिनिधि की जरूरत है जो वास्तव में गांव की समस्या समझे और उसे दूर करे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें