-12 बजे के बाद ही ओपीडी में पहुंच रहे चिकित्सक
-दूरदराज से इलाज कराने पहुंच रहे लोगों को हो रही परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। मांगों को लेकर सोमवार को सातवें दिन भी जिले के अस्पतालों में चिकित्सा ढाई घंटे की पेन डाउन हड़ताल पर रहे। 12 बजे तक मरीज ओपीडी के बाहर चिकित्सकों की राह देखते रहे। वहीं दूरदराज से आने वाले मरीजों को चिंता सताती रही कि अगर 12 बजे के बाद चिकित्सक उन्हें कोई टेस्ट लिखेगा तो उसको सरकारी लैब में इसकी सुविधा नहीं मिल सकेगी।
इस दौरान आपातकालीन और ओटी की सुविधाएं सुचारू रूप से चलती रहीं। लगातार सातवें दिन भी हड़ताल से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। मेडिसिन, स्त्री रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ, ईएनटी ओपीडी के बाहर सुबह 9:00 बजे से लोग चिकित्सकों का इंतजार करते रहे। आईपीडी में राउंड पर भी चिकित्सक 12 बजे के बाद ही पहुंचे। एक ओर जहां सरकार चिकित्सकों की हड़ताल को गंभीरता से नहीं ले रही है, वहीं दूसरी ओर चिकित्सक भी मांगों को लेकर अड़ गए हैं। चिकित्सकों का कहना है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होती हैं, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। लंबे समय से चिकित्सक अपनी मांगों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इससे पहले भी चिकित्सक पेन डाउन हड़ताल और काले बिल्ले लगाकर काम कर चुके हैं। हालांकि उनकी मांगें पूरी नहीं हुई हैं। चिकित्सकों का कहना है कि उन्हें केवल आश्वासन ही मिले हैं। अब इस हड़ताल का खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। सुबह-सुबह लोग पर्ची काउंटर के बाहर लंबी कतारों में लग जाते हैं। इसके बाद उन्हें चिकित्सक के लिए 12 बजे तक का इंतजार करना पड़ता है।
वहीं दूसरी तरफ 12 बजे तक चिकित्सकों के हड़ताल पर रहने से मरीजों को दोहरी परेशानी उठानी पड़ रही है। पहले तो चिकित्सकों का 12:00 बजे तक इंतजार, फिर लाइन में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार और फिर अगर चिकित्सक मरीज की बीमारी का पता लगाने के लिए उसे कोई टेस्ट लिखता है तो उस टेस्ट को कराने के लिए अस्पताल में पीपीपी मोड पर संचालित निजी लैब का रुख करना पड़ रहा है। कारण यह है कि सरकारी लैब में टेस्ट के लिए सैंपल 12:00 बजे तक ही लिए जाते हैं। 12:00 बजे तक हड़ताल होती है और मरीजों को चिंता सताती है कि अगर उसी दिन टेस्ट नहीं हुए तो उन्हें दूसरे दिन फिर से लंबा सफर कर परेशानी का सामना करना पड़ेगा।