संवाद न्यूजी एजेंसी
निरमंड ( कुल्लू ) । निरमंड उपमंडल के बागा सराहन से बठाइड तक प्रस्तावित बशेलउ सुरंग के निर्माण को लेकर बागा सराहन पंचायत प्रधान प्रेम ठाकुर ने लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह से मुलाकात की। यह मुलाकात शिमला स्थित मंत्री के आवास स्थान पर हुई। मांग पर मंत्री ने गौर करने का आश्वासन दिया है। प्रेम ठाकुर ने लोक निर्माण मंत्री को बताया कि यह सुरंग निरमंड खंड की 32 पंचायतों और बंजार खंड की लगभग 12 पंचायतों को जोड़ेगी। इस परियोजना से जिला किन्नौर, रामपुर और अवेरी-पट्टी में स्थित सेना की छावनी को भी सीधा लाभ मिलेगा। सुरंग का सबसे अधिक फायदा यह होगा कि इस क्षेत्र से जिला मुख्यालय कुल्लू के मध्य में सालभर यातायात की सुविधा उपलब्ध होगी। वर्तमान में जलोड़ी दर्रे पर बर्फबारी के दौरान कई कई माह आवाजाही ठप रहती है और क्षेत्र की जनता को मजबूरन सैकड़ों किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय कर जिला मुख्यालय पहुंचना पड़ता है। प्रेम ठाकुर ने लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह को बताया कि इस महत्वपूर्ण परियोजना से संबंधित सभी दस्तावेज लोक निर्माण विभाग में विचाराधीन हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों की मांग है कि इस जनहित योजना को शीघ्र मूर्त रूप दिया जाए। इस बारे में लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि इसकी संभावनाओं पर गौर किया जाएगा और इस मामले पर इंजीनियर इन चीफ के साथ चर्चा की जाएगी। प्रधान प्रेम ठाकुर का कहना है कि निरमंड उपमंडल की 32 पंचायतों की हजारों आबादी को जिला मुख्यालय कुल्लू पहुंचने के लिए वाया जलोड़ी जोत होकर करीब 120 किलोमीटर अतिरिक्त सफर कर पहुंचना पड़ता है। हालांकि, बागा सरहान से बशलेउ जोत होकर बठाहड़ तक सड़क भी प्रस्तावित है, लेकिन इस सड़क के निर्माण में बहुमूल्य पेड़ों का बेहद कटान होगा। बागासराहन से बठाहड़ सुरंग बन जाने से जिला मुख्यालय कुल्लू का सफर आसान होगा। प्रेम ठाकुर ने बताया कि बागासराह पंचायत की ओर से जनवरी 2023 में प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री को भी एक प्रस्ताव भेजा गया है। इसमें बताया है कि निरमंड के आवेरी नामक स्थान पर उत्तरी क्षेत्र थल सेना का प्रशिक्षण केंद्र स्थापित है। यहां से प्रशिक्षण पूर्ण करने के बाद फौज के जवानों को आर्मी की गाड़ियों को लेह लद्दाख और अन्य सीमाओं पर तैनात किया जाता है, जबकि किन्नौर में भी सेना की बड़ी छावनी है। जिन्हें लेह-लद्दाख की सीमा पर आवाजाही करनी होती है। सर्दियों में सैनिकों को वाया करसोग या वाया तत्तापानी, बिलासपुर होकर 300 किलोमीटर से ज्यादा का सफर तय करना पड़ता है । ऐसे में प्रस्तावित टनल का निर्माण होता है, तो सेना के जवानों को लेह-लद्दाख की सीमा तक पहुंचने के लिए साल के 12 महीनों सड़क सुविधा मिलेगी और करीब 200 किलोमीटर कम दूरी तय करनी पड़ेगी।
टनल बनने से पर्यटन को भी लगेंगे पंख
बागा सराहन एक विश्वप्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। यहां 300 बीघा भूमि पर एक पौराणिक मैदाननुमा भाग है, जिसकी सुंदरता को निहारने के लिए हर साल देश-विदेश से पर्यटक पहुंचते हैं। पूर्व भाजपा सरकार के समय में बागा सराहन में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए नई मंजिल-नई राहें योजना के तहत 29 करोड़ 40 लाख रुपये की एक डीपीआर भी विचाराधीन है। ऐसे में बशलेउ टनल के निर्माण से शिमला, कुफरी, नारकंडा से कुल्लू मनाली जाने वाला पर्यटक बागा सराहन की सुंदरता को निहारकर आगे बढ़ सकेंगे।