एसीसी सीमेंट कारखाना में सीमेंट ढुलाई के लिए अधिकृत बीडीटीएस के ऑपरेटरों का ट्रक भाड़ा इस साल घटाया गया है। एसीसी प्रबंधन और बीडीटीएस कार्यकारिणी में हुई बैठक में किराये को घटाने का समझौता हुआ है। हालांकि, डीजल की कीमतों के साथ किराया घटाने और बढ़ाने के फार्मूले में किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया गया है। सूत्रों के अनुसार इस वित्त वर्ष ऑपरेटरों को मिलने वाले किराये के तहत पहाड़ी इलाकों में छह, जबकि मैदानी इलाकों में आठ प्रतिशत की कटौती की गई है।
गौरतलब है कि एसीसी प्रबंधन लंबे अरसे से बीडीटीएस को किराया कम करने के लिए कह रहा था। इसके लिए बीडीटीएस को एसीसी प्रबंधन ने बाकायदा पत्राचार भी किया था। कंपनी प्रबंधन ने हालांकि लगभग 25 प्रतिशत किराया कम करने की बात कही थी। साथ ही यह भी कहा था कि यदि किराये में कटौती नहीं हुई तो घाटे के चलते फैक्टरी को ही बंद करना पड़ेगा। लेकिन, बैठक में छह और आठ प्रतिशत पर सहमति बनने की बात कहीं जा रही है। वर्तमान में मैदानी इलाकों को लगभग 42 रुपये प्रति किलोमीटर प्रति क्विंटल के हिसाब से किराया दिया जा रहा है। जबकि पहाड़ी इलाकों में यह दर 82 रुपये बताई जा रही है। इस साल इस किराये में क्रमश: आठ और छह प्रतिशत की कटौती की जा रही है। बैठक में एसीसी प्रबंधन की ओर से मुंबई से आए वरिष्ठ अधिकारी नवीन चड्ढा, प्लांट हेड राकेश सिन्हा मौजूद रहे। जबकि बीडीटीएस की ओर से प्रधान रमेश ठाकुर, महासचिव रजनीश शर्मा सहित कार्यकारिणी के अन्य पदाधिकारी और सदस्य शामिल हुए।
बीडीटीएस के महासचिव रजनीश शर्मा ने बताया कि निर्णय ऑपरेटरों के हित को देखते हुए लिया गया है। बैठक में लिए निर्णय से ऑपरेटरों की रोजी बचाई गई है। उनके अनुसार किराये में नाममात्र की कमी हुई है। वार्षिक हाईक फार्मूले में कोई बदलाव नहीं किया गया है। फैक्टरी बंद होने का भय भी खत्म हो गया है। उधर, किराया कटौती को लेकर पूर्व प्रधान लेखराम वर्मा ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि यह ऑपरेटरों के हित में नहीं है। इसका वह पूर्ण रूप से विरोध करेंगे। बैठक में लिए गए निर्णय की प्रति लेने के बाद ही पता चलेगा कि किराये में कितनी कटौती हुई है और किस फार्मूले के तहत हुई। इसके दस्तावेज मांगे जाएंगे। उसके बाद आगामी रणनीति बनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि कंपनी ने घाट की बात कहकर ऑपरेटरों से दगा किया है।