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सभा के 800 ऑपरेटरों को मिलेगा 15-15 लाख का दुघर्टना बीमा

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बिलासपुर में एसपी दिवाकर शर्मा को पुष्पगुच्छ देते जेपी उद्योग विस्थापित सभा के सदस्य। - फोटो : BILASPUR
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बिलासपुर। दि बिलासपुर जेपी उद्योग विस्थापित एवं परिवहन सहकारी सभा खारसी ने अपने ट्रक ऑपरेटरों को ग्रुप इश्योरेंस की सुविधा दी है। सभा के प्रति ऑपरेटर 15 लाख का दुर्घटना बीमा करवाया है। इस योजना का शुभारंभ सभा ने शनिवार को उपायुक्त बिलासपुर राजेश्वर गोयल से करवाया। वर्तमान में सभा के अधीन 800 से अधिक ऑपरेटरों की गाड़ियां चल रही हैं।
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सभा के महासचिव दौलत सिंह ठाकुर ने बताया कि यह योजना एसबीआई के साथ मिल कर चलाई गई है। प्रदेश में किसी भी ट्रक यूनियन की ओर से इस प्रकार की सुविधा पहली बार ऑपरेटरों को दी जा रही है।
उन्होंने कहा अगर किसी भी ऑपरेटर की हादसे के दौरान मौत हो जाती है तो उसके परिवार को 15 लाख की वित्तीय सुविधा मिलेगी। इसके अलावा सड़क हादसे या किसी अन्य हादसे में अपंग होने पर अपंगता की प्रतिशत के हिसाब से मुआवजा तत्काल दिया जाएगा। इसके अलावा अगर कोई ट्रक ऑपरेटर हादसे के बाद अस्थायी अपंगता के कारण अस्पताल में भर्ती होता है तो उसे 104 सप्ताह तक 10 हजार रुपये प्रति सप्ताह आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसके अलावा अगर हादसे में किसी व्यक्ति का एक अंग या इससे अधिक कट जाता है या आंखों की रोशनी हादसे में चली जाए तो उस सुरत में भी 15 लाख का मुआवजा दिया जाएगा।
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इस योजना के लाभ देने के लिए सभा हर ऑपरेटर के 832 एसबीआई को अदा करेगी। उक्त राशि सभा के खाते से जमा होगी। ट्रक ऑपरेटरों को इसमें कोई भी सहयोग नहीं करना होगा।
योजना के शुभारंभ के मौके पर उपायुक्त कार्यालय में सभा के प्रधान परमानंद ठाकुर, उपप्रधान धर्मपाल ठाकुर, चेयरमैन महेंद्र सिंह ठाकुर, सदस्य हेमराज शर्मा, जीत राम शर्मा, परस राम ठाकुर और हंस राज शर्मा भी मौजूद रहे।
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सभा ने श्रवण भक्त योजना का भी किया शुभारंभ
श्रवण भक्त योजना के तहत ऑपरेटरों के माता-पिता को देवी दर्शन योजना के तहत हिमाचल प्रदेश के शक्तिपीठों के दर्शन करवाएगी। इस योजना के तहत हर साल सभा अपने खर्च पर100 बुजुर्गों को देवी दर्शन के लिए लेकर जाएगी।
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10 सालों में 17 ऑपरेटर बने हैं काल का ग्रास
सभा के रिकॉर्ड के अनुसार पिछले 10 सालों में करीब 17 लोग विभिन्न हादसों में मौत का शिकार बने हैं। जबकि दर्जनों ऑपरेटर घायल हुए हैं लेकिन किसी प्रकार की कोई बीमा न होने के कारण उनके परिवार के सदस्यों को आर्थिक सहायता नहीं मिल पाई थी।
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